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गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019

कौन है वैभव मिश्र जिसे अखिलेश यादव छूना मत... छूना मत...दूर हटो...हटो...कहकर सार्वजानिक रूप से अपमानित करते रहे

अखिलेश यादव के लखनऊ पहुँचने पर प्रशासन के निर्देश पर लखनऊ प्रशासन की तरफ से ADM वैभव मिश्र अखिलेश यादव जी से बात करने का प्रयास करते हैं तो समाजवादी अखिलेश जी का तमतमाता सामंती चेहरा दिखलाई पडता है साथ ही उनका बात करने का लहजा नशे में चूर किसी क्रूर घमण्डी युवराज जैसा दर्शाता हैलोकतंत्र को बचाने की बात करने वाले का व्यवहारिक ज्ञान कितना शून्य और असवेंदनशील है। आइए पूरे प्रकरण पर प्रकाश डालता हूँ। अखिलेश यादव के गाडी से उतरने के बाद प्रशासन की तरफ से वैभव मिश्र, अखिलेश यादव के अभिवादन के लिए आगे बढते हैं तो अखिलेश यादव भड़क उठते हैं... बोल पडते हैं... छूना मत मुझे... दूर हटो...दूर हटो...  
फिर अखिलेश के सुरक्षाकर्मी वैभव मिश्र को हटाकर किनारे कर देते हैं.... इतना सब होने के बाद भी वैभव मिश्र मुस्कुराते रहे...
जवाब में उन्होंने कहा... सर मैं आपको छूना नहीं चाहता ! बस बात करना चाहता हूँ !
अखिलेश जी कहते हैं दूर से बात करो... किनारे से... 
फिर पूछते हैं... ADM लखनऊ से... कितना पढ़े हो...?
वैभव मिश्र जी व उनका पद स्वयं अखिलेश के लिए एक बेहतर जवाब है,लेकिन कुछ जवाब हमारा भी बनता है कि इन सामंती पूर्व मुख्यमंत्री को-
श्री Akhilesh Yadav जी...
वैभव जी राजाओं की धरती प्रतापगढ़ के बेटे हैं। स्वतंत्रता सेनानियों की माटी हमारी पट्टी के लाल हैं। वैभव मिश्र बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वर्तमान में ADM लखनऊ हैं,वैभव मिश्र वर्ष-2008 पीसीएस के टॉपर। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शोध छात्र रहे वैभव मिश्र पॉलटिकल साइंस से स्नातक और परास्नातक हैं। 25 नवंबर 1980 को जन्में वैभव जब मात्र दो साल के थे तभी एक दुर्घटना में उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। पिता सेना में वारेंट ऑफिसर थे। मां आंगनबाड़ी कार्यकत्री थीं। वैभव मिश्र वर्ष-2006 में जूनियर रीसर्च फेलो हुए। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सर गंगानाथ झा छात्रावास के कमरा संख्या-93 में रहते थे। वैभव मिश्र ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में 40 वीं रैंक प्राप्त की थी। वैभव मिश्र लगातार वर्ष-2008, 2009, 2010 की IAS परीक्षा का साक्षात्कार देते रहे। इस बीच वर्ष-2009 में वैभव मिश्र का चयन इंटर कॉलेज प्रवक्ता पद पर हो गया,जहां इन्होंने लगभग छः महीने अपनी सेवा दी। छः महीने इसलिए क्योंकि इनका वर्ष-2010 में उत्तराखंड PCS में उनका चयन हो गया था। जहां उनकी तीसरी रैंक थी। इसके बाद वर्ष-2011 में UPPCS 2008 का परिणाम आया। जिस शख़्स ने टॉप किया था,उसका नाम था....श्री वैभव मिश्रा ! अखिलेश जी काबिलियत के मामले में आप वैभव के चरणो की धूल भी नही हैं ! यदि आप मुलायम सिंह यादव के बेटे नहीं  होते तो... इस नाम का वजूद ही नहीं होता ! अखिलेश जी एक कहावत है‌ कि रस्सी जल गयी,लेकिन ऐठन नहीं  गयी...! आपको,आपके इस कृत्य पर शर्म आनी चाहिए...! आपके दलीय कार्यक्रमों व कार्यकर्ताओं के व्यवहार को देखकर कभी-कभी तो लगता है कि जिसे आप समाजवादी दल कहते हो वो एक दल नहीं बल्कि गुण्डों का एक गिरोह है...!!!

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