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गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019

अमेजन ने 3150 तो वाॅलमार्ट ने भी गवांए 350 अरब

मोदी सरकार के नए नियम से ऑनलाइन दिग्गजों की फूल रही साँसे...!!! 
वॉलमार्ट व अमेज़न कम्पनी के शेयरों में क्रमशः 2 व 5 फीसद की दर्ज की गई गिरावट से संयुक्त रूप से हुआ 50 अरब डॉलर का नुकसान...!!!
ऑफलाइन रिटेलर्स बोल रहे "थैंक यू मोदी"
अमेजन और वालमार्ट दोनों के शेयरों में शुक्रवार को क्रमश: पांच फीसदी और दो फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और दोनों कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में संयुक्त रूप से 50 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों ने कहा कि इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट उनके भारतीय कारोबार के सामने पैदा हुई अड़चनों के बाद आई है। भारत ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए नए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों को शुक्रवार से लागू किया गया।
अमेजन को 3,150 अरब रुपए का घाटा...
 सरकार के फैंसले ने किया कंगाल... 
नासडेक पर अमेजन के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में 45 अरब डॉलर (करीब 3,150 अरब रुपए) से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (एनवाईएसई) पर वालमार्ट के मार्केट कैप में पांच अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार के कारोबार के अंत में अमेजन का मार्केट कैप 798.81 अरब डॉलर और वालमार्ट का 272.69 अरब डॉलर रहा।नासडेक पर अमेजन के शेयरों में 5.38 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो शुक्रवार को 1626.23 रुपये प्रति शेयर की दर पर बंद हुआ, जबकि एनवाईएसई पर वालमार्ट का शेयर 2.06 फीसदी की गिरावट के साथ 93.86 रुपये प्रति शेयर की दर पर बंद हुआ।
भारत में लागू हुआ नया नियम...
नए नियमों के तहत भारत में ई-टेलर्स को उन उत्पादों को बेचने से प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिसमें उनकी हिस्सेदारी हो। इसके बाद अमेजन इंडिया ने कई उत्पाद अपनी वेबसाइट से हटा लिए हैं और वे 'वर्तमान में अनुपलब्ध' दिख रहे हैं। अमेजन और वालमार्ट दोनों ने नए नियमों को लागू करने की समय सीमा छह माह के लिए बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए नए नियमों को फरवरी से लागू कर दिया।
दिसंबर में जारी हुआ था नया नियम...
नए नियम दिसंबर में जारी किए गए थे, जिसके तहत ऑनलाइन रिटेलरों द्वारा किसी कंपनी के उत्पाद एक्सक्लूसिव रूप से बेचने पर रोक लगा दी गई है। वाणिज्य मंत्रालय ने नए नियमों में यह भी कहा कि ऑनलाइन रिटेल कंपनियां वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री की कीमत को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं करेगी और सभी विक्रेताओं के लिए समान अवसर प्रदान करेगी। हालांकि वालमार्ट और अमेजन जैसे प्रमुख हितधारकों ने समय सीमा में विस्तार की मांग की थी, वहीं, अन्य कंपनियों जैसे स्नैपडील और कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स की अगुवाई में ऑफलाइन रिटेलरों ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया

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