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गुरुवार, 17 जनवरी 2019

टाइम्स ऑफ इंडिया के छायाकार के साथ संगम नगरी में राष्ट्रपति के कवरेज के दौरान पुलिस ने की बदसलूकी

जब मीडिया में चंद लोग थे तो उनका सम्मान होता था मीडिया में आज सैकड़ों लोग हैं तो सम्मान खुलेआम नीलाम हो रहा है...!!!
अपराधी किस्म के लोग,टिकिया चोर,पत्रकारिता के चोले में दलाल,स्मैकिया एवं शराबी पत्रकारों की फौज जब मीडिया को सुरक्षित और संरक्षित ठिकाना बना चुकी है तो ऐसी घटनाएं होती रहेगी...!!!
मीडिया के लिये भी लक्ष्मण रेखा का निर्धारण होना चाहिये और उसका उल्लंघन करने पर उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करनी चाहिये...!!! 
समय रहते मीडियाकर्मियों को भी आत्ममंथन करना होगा...!!!
प्रयागराज। छोटे बैनरों से जुड़े मीडियाकर्मियों के साथ जब उनका मान मर्दन होता है तो बड़े बैनरों से जुड़े कथित दिग्गज पत्रकारों की टोली अपने मीडिया के साथी का विरोध करती है और अपनी चमचागीरी के लिए सिस्टम का तलवा चाटती है। सच यही है,इसी वजह से प्रयागराज नगरी के कुम्भ मेले में कल खाकीधारियों ने मीडिया के साथी को अपना निशाना बनाया। जब बड़े बैनरों से जुड़े मीडियाकर्मी के साथ बदसलूकी की घटना घटित होती तो बड़े बैनर से जुड़े लोग चाहते हैं कि बदसलूकी करने वाले को फाँसी हो जाए और यही छोटे बैनरों से जुड़े मीडिया के साथी से बदसलूकी होती है तो वही बड़े बैनरों से जुड़े मीडिया के लोग अपने बैनरों में कवरेज तक नहीं करते। साथ देने और आवाज उठाने की बात दीगर रही। मीडिया से जुड़े साथियों सच स्वीकार करना सीखिए। ये वर्दी की ताकत नहीं,आपकी कमजोरी है। क्योंकि आप आपस में एकजुट नहीं हो। "फूट डालों और राज करो" वाले फार्मूले पर देश की नौकरशाही काम कर रही है। चूँकि देश की नौकरशाही ये फार्मूला ब्रिटिश हुकूमत से विरासत में प्राप्त की है।
रेवड़ी की तरह बाँटे गए हैं कुम्भ मेले में मीडियाकर्मियों को पास...!!!
सूबे में सरकार चाहे जिस दल की रही,परंतु पत्रकारों के साथ बदसलूकी की घटनाएं होती रही। आज सूबे में योगी की सरकार है। योगी सरकार में भी मीडिया की जो दुर्गति है वो किसी से छिपी नहीं है। उदाहरण प्रयागराज संगम नगरी में मीडिया के साथ घटित घटना से सबक लिया जा सकता है। योगी पुलिस की ये बदतमीजी,बदसलूकी,बददिमागी है,जो महीनों से संगम नगरी में सदाचार के गुण सीख रही है। योगी सरकार की पुलिस गुंडों,बदमाशों,तस्‍करों,माफियाओं और नेताओं के आगे जहाँ नतमस्तक है। उनके सामने उनकी घिघ्‍घी बंधी रहती है। वहीं कमजोर और लाचार व्यक्तियों के सामने ये किसी तानाशाह से कम औकात नहीं रखते। यदि कमजोर और लाचार व्यक्ति मीडिया जगत से है तो सारा फ्रस्‍ट्रेशन उस मीडियाकर्मी पर ये पुलिस के जवान निकालने में कसर नहीं छोड़ते। क्योंकि अंदर ही अंदर ये पुलिस वाले और भ्रष्ट किस्म के बेईमान नौकशाह अपनी खिसियाहट और टीस निकालने का मौका तलाशते रहते हैं। कल जो कार्य प्रयागराज में योगी की काबिल पुलिस द्वारा किया,उससे ये तय हो गया कि इलाहाबाद की मीडिया खुद बेहद निरीह है। जिसका फायदा समय-समय सभी सरकारों में पुलिस वाले उठाया करते हैं। वर्दीधारियों को किसी की मानहानि का करने का अधिकार किसने दे दिया ? ये सवाल वाजिब है और इसे पूछा जाना चाहिए। मगर मीडिया वालों को इन नेताओं और अफसरों की चमचागीरी करनी है तो ये सब झेलना ही पड़ेगा। "सोशल मीडिया" से इतर अगर सचमुच आक्रोश है तो दो दिन में नजारा बदल सकता है,मगर मीडिया को अपनी ताकत दिखानी होगी। आप पिट रहे हैं तो यह पुलिस की ताकत नहीं,आपकी कमजोरी है। ये मेरा क्षोभ है,जानता हूं,फिर भी बिना कहे अपने आपको रोक नहीं पा रहा हूँ। मेरे कोसने और लिखने से सिस्टम पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा,लेकिन मीडियाकर्मी अपनी हैसियत पर एक बार विचार जरूर करें...!!!

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