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शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018

बूचड़खाने जैसे हालात हो गए हैं,अशासकीय विद्यालयों में शिक्षक भर्ती की...

उद्योग विहीन जनपदों में शिक्षक भर्ती के नाम पर चयन बोर्ड और प्रबंधकों  की मिली मार से शिक्षा का स्तर हुआ बद से बद्तर... 
                         स्वर्गीय मुनीश्वर दत्त उपाध्याय जी....
लखनऊ l सूबे में शिक्षा का हाल बेहाल हाल है l शिक्षण संस्थाओं का बुरा हाल है l सूबे में सरकारें आती रहीं और जाती रहीं, कार्य के नाम पर सिर्फ दावे और घोषणायें ही होती रहीं l शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं से जुड़े लोग इतने निडर और भ्रष्ट हो चुके हैं कि उन्हें किसी का डर नहीं l न्यायालय को भी गुमराह कर इन संस्थाओं से जुड़े लोग अपना उल्लू सीधा करने में पीछे नहीं रहते l बात करते हैं,सूबे के शिक्षण ब्यवस्था के सम्बन्ध में l उद्योग विहीन जनपद प्रतापगढ़ की बात करें तो शिक्षा के क्षेत्र में दूसरे मालवीय व आदर्श नेता स्वर्गीय मुनीश्वर दत्त उपाध्याय की तपोभूमि के रूप में प्रतापगढ़ का नाम शिक्षा जगत में बड़े आदर्श के साथ लिया जाता है। उपाध्याय जी ने दो दर्जन से अधिक विद्यालयों की स्थापना की, जिसको समूह में ग्रामीण इंटर कॉलेजेज के नाम से भी जाना जाता है। स्वर्गीय उपाध्याय की संस्थाओं के मुखिया बीरापुर विधायक रहे रामराज शुक्ल हुए और उनकी मृत्युपरांत पंडित जी के सभी शिक्षण संस्थाओं की कमान उनके पुत्र श्याम किशोर शुक्ल के हाथ में आई । श्याम किशोर शुक्ल का सम्बन्ध कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी से है और अपने शिक्षण संस्थाओं को बचाने के लिए श्याम किशोर शुक्ल, कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी से मदद लेते रहे l कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी इस मदद की आंड़ में पंडित जी के कई शिक्षण संस्थाओं पर अपना आधिपत्य बना लिया l पूरे प्रदेश में कई विधायकों और मंत्रियों एवं सांसदों के भी कई शिक्षण संसथान हैं और उनके परिवार के लोग ही इन शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधक हैं l ये सभी विद्यालय माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित हैं। शासन सत्ता का दबाव इस कदर रहता है कि इनके प्रबंधकीय शिक्षण संस्थाओं में कोई अधिकारी आँख उठाकर देखना भी उचित नहीं समझता l

 सूबे के मुखिया योगी आदित्य नाथ जी...
उत्तर प्रदेश में वर्ष 1982 में माध्यमिक शिक्षा नियमावली 1982 का निर्माण हुआ तथा शिक्षक नियुक्त करने के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का गठन हुआ। सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि आगे से प्रबंध तंत्र शिक्षक का चयन नही करेंगे। जिस विद्यालय में शिक्षक की जरूरत होगी, वो विद्यालय जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को अधियाचन भेजेगा तत्पश्चात चयन बोर्ड शिक्षक नियुक्त करेगा। चयन बोर्ड के निर्माण के बाद भी चयन बोर्ड शिक्षकों की नियुक्ति न कर सका तो सरकार और प्रबंध तंत्र दोनों ने अल्पकालिक अथवा तदर्थ शिक्षकों की नियुक्ति की जो कि चयन बोर्ड से शिक्षक आने पर हट जाते। सरकार ने वर्ष 1982 से वर्ष 1993 तक अस्थाई रूप से चयनित सभी शिक्षकों को स्थापित करते हुए कहा कि अब किसी भी हालत में अस्थाई नियुक्ति नहीं होगी, मगर उसके बाद भी चयन बोर्ड शिक्षक आपूर्ति में असफल रहा। सरकार ने 07 अगस्त,1993 से दिनांक 30 दिसंबर, 2000 तक 1408 तदर्थ शिक्षक और दिनांक 07 अगस्त,1993 से दिनांक 25 जनवरी,1999 तक 526 अल्पकालिक शिक्षकों का चयन किया कि चयन बोर्ड द्वारा शिक्षक आने पर ये हट जाएंगे। जनपद प्रतापगढ़ में सरकार ने तदर्थ और अल्पकालिक शिक्षकों की एक भी नियुक्ति नहीं की,जबकि प्रबंध समिति द्वारा लगभग 284 शिक्षकों की नियुक्ति तदर्थ (एडहॉक) पर किया l इसी तरह सम्पूर्ण प्रदेश में प्रबंध तंत्र अधियाचन भेजता रहा और चयन बोर्ड से शिक्षक न आने पर स्वतः नियुक्ति करता रहा । 

उप मुख्यमंत्री/शिक्षा मंत्री पंडित दिनेश शर्मा जी...

प्रबंध तंत्र से नियुक्त शिक्षक हाईकोर्ट से इस शर्त पर वेतन का आदेश प्राप्त कर लेता कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा नियुक्त शिक्षक आने पर प्रबंध तंत्र द्वारा नियुक्त शिक्षक का वेतन बन्द करके नौकरी से हटा दिया जाएगा । सरकार ने दिनांक 30 दिसंबर, 2000 के बाद एक भी अस्थाई नियुक्ति नहीं की तथा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड नियुक्ति करने में बहुत हद तक नियमित हो गया l सरकार द्वारा अस्थाई नियुक्ति बन्द होने के बाद प्रबंध तंत्र को भी शिक्षक नियुक्ति बन्द कर देनी चाहिए थी, मगर प्रबंध तंत्र ने एक काट निकाला कि अधियाचन भेजकर उसे चयन बोर्ड में दबवा देती और विज्ञापन निकालकर नियुक्ति कर देती। प्रबंध समिति द्वारा नियुक्त हुए शिक्षक हाईकोर्ट जाकर चयन बोर्ड से शिक्षक आने तक के लिए वेतन का आदेश प्राप्त कर लेता है। प्रबंध तंत्र की यह पोल उस वक्त अचानक खुल गयी, जब संतोष कुमार सिंह की एक याचिका इलाहाबाद में न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने खारिज कर दी। याची अपील में गया तो मामला तीन जजों की पीठ को संदर्भित हो गया और उक्त प्रकरण की सुनवाई मुख्य न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता एवं न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार सिंह बघेल ने की l

 सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टिकी है,शिक्षकों की नौकरी...
पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रबंध तंत्र द्वारा नियुक्त शिक्षक विनियमितीकरण का अधिकार नहीं हैं। उक्त याचिका के निस्तारण के बाद मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ जी उच्च न्यायालय की "खंडपीठ लखनऊ" गये थे और उसी वक्त प्रतापगढ़ के लोकमान्य तिलक इंटर कॉलेज के प्रबंध तंत्र द्वारा नियुक्त शिक्षक अभिषेक त्रिपाठी अपने वेतन की मांग के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल किये थे l उच्च न्यायालय ने सरकार से जवाब मांगा तो सरकार ने कहा कि इनको वेतन नहीं दिया जा सकता l चूँकि 30 दिसंबर, 2000 के बाद प्रबंध तंत्र को शिक्षक नियुक्ति का अधिकार नहीं है l सरकार द्वारा 30 दिसम्बर, 2000 के पूर्व नियुक्त 1408 तदर्थ और 526 अल्पकालिक शिक्षकों को दिनांक 7 मार्च, 2016 को एक्ट 2016 पारित करके स्थाई कर दिया है l सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वर्ष-1993 से वर्ष-2000 के बीच प्रबंधक ने जो नियुक्ति की है, उनके लिए सरकार ने कोई राहत नहीं दी l 30 दिसंबर, 2000 के बाद प्रबंधक को शिक्षक नियुक्ति का अधिकार ही नहीं है। इस प्रकार सरकार के पक्ष से संतुष्ट होकर कोर्ट ने आदेश किया कि 30 दिसंबर, 2000 के बाद प्रबंधक को शिक्षक नियुक्ति का अधिकार नही है, अतः वेतन नहीं दिया जाएगा। इस प्रकार एक झटके में 30 दिसंबर, 2000 के बाद प्रबंधक द्वारा नियुक्त शिक्षक सड़क पर आ गये l इस आदेश के विरुद्ध संजय सिंह सुप्रीम कोर्ट गये तो सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी l इस प्रकार प्रबंधक को 30 दिसंबर, 2000 के बाद शिक्षक नियुक्ति का अधिकार है कि नहीं है ? उक्त प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, परन्तु जो शिक्षक प्रबंधक द्वारा नियुक्त किये गए हैं, वे मात्र चयन बोर्ड से शिक्षक आने तक के लिए नियुक्त हैं l

 उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड...
इस प्रकार उत्तर प्रदेश में लगभग 39,632 पद रिक्त हैं, जिसमें 25,126 पदों पर चयन बोर्ड को प्रबंधकों द्वारा अधियाचन दिया गया है, जबकि 14,526 पद पर माध्यमिक शिक्षा विभाग को अधियाचन प्राप्त नहीं है l इन पदों पर चयन बोर्ड शिक्षकों की नियुक्ति कर सकती है,परन्तु प्रतापगढ़ जनपद में इन पदों पर नियुक्ति करना कठिन है, क्योंकि प्रतापगढ़ में लगभग 15 वर्षों से भी अधिक समय से माध्यमिक शिक्षा विभाग को अधियाचन भेजकर बाद में रिक्ति को छिपा लिया जाता है, जिससे चयन बोर्ड प्रतापगढ़ जैसे जनपदों में शिक्षक का अभाव रहते हुए भी नियुक्ति नहीं कर पाता l क्योंकि प्रबंधक/अध्यक्ष अपने खास आदमी को शिक्षक पद पर नियुक्त किये रहते हैं l उदाहरण के तौर पर रामराज इंटर कॉलेज पट्टी में राम कृष्ण मिश्र प्रबंधक/अध्यक्ष द्वारा नियुक्त इतिहास के प्रवक्ता हैं। वर्ष 2003 से कार्यरत हैं। चयन बोर्ड की नजर में यह पद रिक्त है तथा अधियाचन के खेल में कहीं गड़बड़ी हो जाने के कारण चयन बोर्ड ने शिक्षक भेज दिया तो बहुत प्रयास के बाद चयन बोर्ड से आये शिक्षक से राम कृष्ण मिश्र को राहत मिल सकी l इसी तरह एक ताकतवर प्रबंध तंत्र की संस्था में चयन बोर्ड द्वारा भेजे गये कला शिक्षक वीरेंद्र कुमार पाण्डेय को प्रबंधक ने कार्यभार नहीं ग्रहण कराया तो जिला विद्यालय निरीक्षक प्रतापगढ़ उक्त शिक्षक को राजकीय माध्यमिक विद्यालय धौरहरा में अटैच करके वेतन दे रहे हैं। इस तरह के अन्य मामले भी हैं। इस प्रकार एक पद पर कई जगह पर दो लोगों को वेतन मिल रहा है। एक नियुक्ति प्रबंधक करके बैठे हैं तो दूसरा शिक्षक उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से आया है। 

 माध्यमिक शिक्षा परिषद्,उत्तर प्रदेश,इलाहाबाद...
कार्यालय-जिला विद्यालय निरीक्षक में कार्यभार ग्रहण कराकर बैठे हैं। कई शिक्षकों को राजकीय विद्यालयों में अटैच किया गया है l अशासकीय विद्यालय के शिक्षक से राजकीय विद्यालय में पढ़वाना भी विधि विरुद्ध है। उ.प्र.लोक सेवा आयोग राजकीय विद्यालयों में नियुक्ति करने वाला है तो सबसे बड़ा सवाल है कि क्या योगी सरकार उक्त शिक्षकों को अशासकीय विद्यालय में भेज पाएगी ? इस प्रकार लगभग 25 हजार से 39 हजार पदों पर सरकार द्वारा शिक्षक नियुक्त करना सरल नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण विषय है कि सूबे के उप मुख्यमंत्री/उच्च शिक्षा/माध्यमिक शिक्षा मंत्री से प्रदेश के युवा वेरोजगारों का सवाल है कि प्रबंधक और विभाग के अधियाचन के खेल से उन्हें कैसे निजात दिलाएंगे...???  जबकि सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ फूलपुर उपचुनाव में सार्वजानिक मंच से प्रदेश के वेरोजगार युवाओं को आश्वस्त किये कि जल्द ही उ प्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का गठन करके युवाओं को रोजगार दिया जाएगा l उधर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका संख्या-15272/201 6 एवं 15277/2016 में यह सुनवाई होने वाली है कि 30 दिसम्बर, 2000 के बाद अशासकीय विद्यालयों में चयन बोर्ड द्वारा शिक्षक न भेजे जाने पर प्रबंधक/अध्यक्ष को शिक्षक नियुक्त करने का अधिकार है कि नहीं ? यदि सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायधीश रहे न्यायमूर्ति डॉ डी वाई चंद्रचूड़ के आदेश को स्वीकार किया जाता है तो प्रबंधको द्वारा नियुक्त शिक्षकों की हालत शिक्षामित्रों से भी बद्तर हो सकती है l 

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