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गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती में प्रशिक्षण प्राप्त किये जनपद से ही नौकरी हेतु आवेदन करने की बाध्यता हुई समाप्त

प्राथमिक शिक्षा विभाग में उत्तर प्रदेश सरकार का सराहनीय निर्णय... 
उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए बीटीसी प्रशिक्षु मात्र जिस जिले से प्रशिक्षण प्राप्त किया रहता था,वहीं से आवेदन कर पाता था। लखनऊ निवासी अम्बरीश कुमार तिवारी ने इस समस्या को चुनौती के रूप में स्वीकार किया तथा प्रतापगढ़ निवासी राहुल पाण्डेय हमेशा उनका मनोबल बढ़ाते थे कि चयन में जिला वरीयता समाप्त होकर रहेगी। अब तक उत्तर प्रदेश में जितनी भी भर्ती हुई अम्बरीश कुमार तिवारी ने समस्त भर्ती को चुनौती दी। प्राइमरी में पहले मात्र उत्तर प्रदेश से ही बीटीसी करने वालों को अवसर मिलता था, मगर RTE एक्ट लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश के ऐसे अभ्यर्थी जो कि बाहर राज्य से प्रशिक्षण प्राप्त किये रहते थे, उनको भी केंद्र व एनसीटीई ने भर्ती में आवेदन का मौका दिया, मगर उत्तर प्रदेश राज्य ने इसे स्वीकार नही किया तो अदालत ने प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि सरकार किसी को गृह राज्य का ही शिक्षण संस्थान चुनने के लिए बाध्य नही कर सकती है। प्रदेश सरकार ने अपनी नियमावली में कोर्ट के आदेश को क्रियान्वित करते समय बीटीसी के लिए जिला वरीयता की बाध्यता भी खत्म कर दी है। इस पर अम्बरीश कुमार तिवारी और उनके साथियों ने प्रसन्नता जाहिर की। राहुल पाण्डेय ने कहा कि यह बीटीसी के बच्चों के संघर्ष का प्रतिफल और सत्य की जीत है। अब किसी भी जिले से प्रशिक्षण लेने वाला बीटीसी प्रशिक्षु अन्य जिले से भी नौकरी हेतु आवेदन कर सकेगा। जिला वरीयता का खामियाजा उन बेरोजगारों को सबसे अधिक भुगतना पड़ता था जहां पर भर्ती हेतु बहुत कम रिक्ति आती थी। भर्ती में वही आवेदन कर सकेगा जो कि आवेदन के पूर्व तक न्यूनतम पांच वर्ष से अनवरत उत्तर प्रदेश का निवासी होगा और उसके पास तहसील द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र मौजूद होगा।

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