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बुधवार, 24 जनवरी 2018

कथित करणी सेना के गुंडों का पद्मावत विरोध कहीं संजय लीला भंसाली की बड़ी डील का हिस्सा तो नहीं...

फिल्म पद्मावत का विरोध कराकर संजय लीला भंसाली कहीं उसका प्रमोशन तो नहीं करा रहा...???
 संजय लीला भंसाली का पद्मावत प्रेम...
गुरुग्राम (गुड़गांव) में 8 से 12 वर्ष के बच्चे सहम कर स्कूली बस की सीटों के नीचे दुबके हुए हैं,क्योंकि उनके खून के प्यासे करणी सेना के गुण्डे उनकी बस पर धुआंधार पत्थर बरसा रहे हैं। यदि उसमें से एक भी पत्थर 8-10 बरस के उन अबोध बच्चों में से जिस किसी के भी सिर पर लग जाता तो उसका प्राणान्त होना निश्चित था। करणी सेना के उन पत्थरबाज गुण्डों-लफंगों से लेकर न्यूजचैनलों पर तमक-बमक रहे करणी सेना के कर्ता धर्ता ठेकेदारों को क्या नहीं मालूम कि उस बस में संजय लीला भंसाली नहीं बल्कि अबोध मासूम बच्चे बैठे हैं,जो उस निर्दोष मां की संतान है,जिसका संजय लीला भंसाली या उसकी फ़िल्म से कोई लेनादेना नहीं है। 

पद्मावत विवाद: गुरुग्राम में स्कूल की बस पर करणी सेना का हमला,रोते-बिलखते नजर आए मासूम...
आज हमारी तरह देश के बहुत से नागरिकों के मन में एक सवाल कौंध रहा है कि इन राजपूतों के स्वघोषित ठेकेदारों से कि संजय लीला भंसाली टिम्बक टू में नहीं रहता। मुम्बई में उसका आलीशान बंगला और आलीशान कार्यालय है। इन ठेकेदारों का यदि इतना ही खून खौल रहा है तो मुम्बई जाकर उसका घर और दफ्तर क्यों नहीं घेर लेते.? पिछले कई दिनों से ये ठेकेदार पूरे देश में घूम घूमकर हिंसा की आग भड़काने में जुटे हुए हैं लेकिन मुम्बई में संजय लीला भंसाली के घर और दफ्तर जाने की इनकी हिम्मत आजतक नहीं हुई। दरअसल ये जानते हैं कि जिस दिन इन्होंने ऐसी कोशिश की उसी दिन इनको इनकी औकात पता चल जाएगी। स्कूली बच्चों की बसों और निर्दोष नागरिकों के वाहन जलाने तोड़ने के लिए एक शहर के 25-50 गुण्डे लफंगे काफी होते हैं। लेकिन भंसाली के घर दफ्तर जाकर यदि ऐसी कोशिश की तो पुलिस के डण्डों से पिछवाड़ा इतनी बुरी तरह लाल किया जाएगा कि लाली कम होने,खत्म होने में कई दिन लग जाएंगे।

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