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मंगलवार, 30 जनवरी 2018

कंधई पुलिस का कारनामा,4 दिन बीतने के बाद भी कंधई पुलिस नहीं दर्ज की लूट की प्राथमिकी...!!!

लूट की घटना की प्राथमिकी दर्ज न करने पर पीड़ित ने मुख्यमंत्री उ.प्र./प्रमुख सचिव,गृह (गोपन विभाग)/पुलिस महानिदेशक, उ.प्र./एडीजी/आईजी जोन,इलाहाबाद/डीआईजी रेंज, इलाहाबाद/मंडलायुक्त, मंडल-इलाहाबाद/जिलाधिकारी, प्रतापगढ़/पुलिस अधीक्षक, प्रतापगढ़ से लूट का मुकदमा दर्ज कराने की लगाई,गुहार। कनपटी पर तमंचा सटाकर गणतंत्रता दिवस की शाम को दुकान से घर आते समय रास्ते में अपाची सवार तीन अज्ञात लुटेरों ने बाइक,मोबाईल समेत 2700 रुपए नगदी लूटने की घटना को दिया था,अंजाम। पीड़ित रमा शंकर का आरोप कि थानाध्यक्ष कंधई लूट की तहरीर में बदलाव करने के लिये बना रहे दबाव। बिन प्राथमिकी दर्ज किये सम्भावित लुटेरों को पकड़ कर कंधई पुलिस पर धनादोहन कर उन्हें छोड़ देने का पीड़ित ने लगाया आरोप
 लूट की घटना को दी गई तहरीर...
प्रतापगढ़। कंधई थाना क्षेत्र के इटवा गांव निवासी रमा शंकर पुत्र जगन्नाथ वर्मा रोज की तरह गणतंत्रता दिवस 26 जनवरी के दिन शाम को अपनी दुकान बंदकर मंगरौरा से इटवा अपने घर समय लगभग-7:30 पर जा रहा था कि रास्ते में उतरास मंदिर के पास सफेद अपाची सवार अज्ञात तीन लोग अपना मुंह बांधकर प्रार्थी को ओवरटेक कर गाड़ी आगे लगाकर रोक लिए और उसके कनपटी पर तमंचा सटाकर जेब से एक मोबाइल रेडमी और 2700 रूपये छीन लिए। पैसा और मोबाइल निकालने के बाद उसकी मोटर साइकिल स्पेन्लेंडर प्रो जिसका नम्बर UP-AC-3863 को भी लूट लिए और लूटने के बाद पुनः मंगरौरा की तरफ भाग निकले। तीन लुटेरों में से एक लुटेरा उसकी गाड़ी पर सवार हुआ और दो लुटेरे सफेद अपाची पर सवार होकर भाग निकले। वह तीनों बदमाशों को पहचान न सका क्योंकि तीनों बदमाश अपना चेहरा पहचान छिफाने के मकसद से मफलर से बांध रखे थे।
लूट हुई की मोटर साईकिल की आर सी....
लुटेरों के चले जाने के बाद हल्ला-गुहार मचाते हुए पीड़ित रमा शंकर पैदल कहैनिया पहुंचा,जहाँ से अपने परिचित की मोबाईल से वह अपने घर पर अपने साथ घटित लूट की घटना की सूचना दिया। घरवालों के पहुंचने पर वह थाना-कंधई पहुँच कर घटना के सम्बन्ध में लिखित तहरीर दिया कि उसके साथ हुई लूट की प्राथमिकी दर्ज की जाए,परन्तु थानाध्यक्ष कंधई द्वारा उसकी तहरीर में बदलाव करने सम्बन्धी हिदायत दी गई और तहरीर में सुधारकर घटना लूट की नहीं बल्कि मोटर साइकिल खड़ी कर रास्ते में पेशाब करने रुका था,तब ये घटना हुई और मोबाइल और पैसा भी मोटरसाइकिल की डिग्गी में रखा था। सच बात को थानाध्यक्ष हजम कर अपनी गर्दन बचाना चाहते हैं। सच बात तो यह है कि उसकी मोटरसाइकिल में डिग्गी लगी ही नहीं तो उस बात को वो कैसे लिख दे। पीड़ित के साथ लूट हुई है, फिर भी थानाध्यक्ष लुटेरों को बचा रहे हैं। थानाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध है। उक्त घटना का मुकदमा तो नहीं लिखे,परन्तु 5 लोगों को पकड़ कर उनसे धनादोहन कर उन्हें छोड़ने का कार्य थानाध्यक्ष महोदय द्वारा किया गया। सरकार को ऐसे ही पुलिस वाले बदनाम कर रहे हैं।
 लूट हुई मोबाईल की रसीद...
पीड़ित ने मुख्यमंत्री सहित आलाधिकारियों को जरिये ई-मेल और मुख्यमंत्री की जनसुनवाई पोर्टल पर आईजीआरएस के जरिये घटित घटना की तहरीर जो उसने थानाध्यक्ष, कंधई को घटना घटित होने के दिन ही दिया था,उसी तहरीर पर मुकदमा पंजीकृत कराने का अनुरोध किया है। उधर थानाध्यक्ष कंधई ने पीड़ित के सारे आरोप को खारिज करते हुए इतना ही स्वीकार किया कि घटना के दिन कुछ लोग आए थे और दुबारा उनसे इस घटना में कोई सम्पर्क ही नहीं किया। कितना हास्यास्पद है,थानाध्यक्ष कंधई का बयान कि तहरीर देने के बाद से पीड़ित उनसे सम्पर्क ही नहीं किया ? योगी सरकार में दावे तो बहुत किये जा रहे हैं कि पूर्ववर्ती सरकारों में पीड़ित का मुकदमा नहीं लिखा जाता था और वर्तमान सरकार में सभी तरह के मुकदमें वादी की तहरीर पर लिखे जा रहे हैंं। जबकि हकीकत कुछ अलग ही बयान करती है। पीड़ित रमा शंकर उसकी बानगी मात्र है। सवाल उठता है कि जब पीड़ित ने तहरीर दे दिया था तो उसका थानाध्यक्ष कंधई से पुनः सम्पर्क करने का औचित्य समझ के परे है। क्या पीड़ित अपनी तहरीर बदलने वह कंधई पुलिस के पास जाए...???

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