कुंडा के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ "राजा भईया" का विवादित जन्मदिन

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राजा भईया का है विवादों से पुराना नाता...!!!
 राजधानी लखनऊ में अपना जन्मदिन मनाते कुंडा के बाहुबली विधायक राजा भईया...
रघुराज प्रताप सिंह "राजा भईया" का जन्म 31 अक्टूबर 1967 को पश्चिम बंगाल में हुआ था। प्रतापगढ़ के भदरी रियासत के राजा उदय प्रताप सिंह इनके पिता और मंजुल राजे उनकी माँ हैं। इनके दादा राजा बजरंग बहादुर सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और हिमांचल प्रदेश के राज्यपाल थे। रघुराज प्रताप सिंह के पिता राजा उदय प्रताप सिंह विश्व हिन्दू परिषद् व राष्ट्रीय सेवक संघ के मानद पादाधिकारी रह चुके हैं। इनकी माता मंजुल राजे भी एक शाही परिवार की है। रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भईया का विवाह बस्ती रियासत की राजकुमारी भान्वी देवी से हुआ। इनके दो पुत्र शिवराज एंव ब्रृजराज एवं दो पुत्रियां राधवी और ब्रृजेश्वरी हैं।रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भईया की प्राथमिक शिक्षा प्रतापगढ़ और इलाहाबाद से सम्पन्न हुईराजा भईया लखनऊ युनिवर्सिटी से मिलिट्री साइंस और भारतीय मध्यकालीन इतिहास में स्नातक है और लखनऊ युनिवर्सिटी से ही इन्होंने कानून में स्नातक की डिग्री भी हासिल की। घुड़सवारी और निशानेबाजी के शौकीन राजा भईया के बारे में कहा जाता है कि वे साईकिल चलाने से लेकर एयर क्राफ्ट उड़ाने तक का कारनामा करते हैं।
वर्ष-2007 में अपने नामांकन में हलफनामे में राजा भईया ने माना था कि वो 33वर्ष के हैं...

राजा भईया अपने परिवार के पहले ऐसे सदस्य हैं,जिन्होंने पहली बार राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश किया। कुँवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भईया का नाता विवादों से भरा पड़ा है। रघुराज प्रताप सिंह सिंह उर्फ राजा भईया बहुत पहले अपनी राजनीतिक कैरियर की शुरूआत किये। वर्ष-1993 में पहली बार में ही कुंडा विधानसभा का चुनाव लड़कर जीत हासिल करने के बाद फिर वो पीछे मुड़कर कभी नहीं देखे। राजा भईया बारहवीं विधानसभा में विधानसभा की पहली सदस्यता प्राप्त कर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर आज सोलहवीं विधानसभा के सदस्य के रूप में हैं। राजा भईया का जन्म 31अक्टूबर,1967 को पश्चिम बंगाल में हुआ था। यदि इसको सही माना जाए तो आज कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भईया की उम्र-50 वर्ष है। जबकि कल उन्होंने स्वयं अपने 48वें जन्मदिन का केककाट कर राजधानी लखनऊ में समर्थकों संग अपना जन्मदिन मनाया। वर्ष-2007 में विधानसभा चुनाव में दाखिल शपथपत्र में अपनी उम्र बहलफ-33 वर्ष एवं वर्ष-2012 में बहलफ-38 वर्ष और वर्ष-2017 में बहलफ उम्र-43 वर्ष होने का हलफनामा देकर निर्वाचन के नामांकन में अपनी उम्र अंकित की है। 
वर्ष-2012में अपने नामांकन में हलफनामे में राजा भईया ने माना था कि वो 38वर्ष के हैं...
राजा भईया द्वारा जिला निर्वाचन अधिकारी/रिटर्निग ऑफिसर के समक्ष दिया गया हलफनामा वर्ष-2007 व वर्ष-2012 एवं वर्ष-2017 को मान लिया जाए तो वर्ष-1993 में राजा भईया विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए अंडर ऐज थे l वर्ष-2017 में राजा भईया अपनी उम्र- 43 वर्ष दर्शायें है तो 43-24 निकाल दीजिये तो राजा भईया की उम्र वर्ष-1993 में उनकी उम्र-19 वर्ष ही रही l  विधानसभा की सदस्य के लिए कम से कम उम्मीवार की उम्र-25 से कम नहीं होनी चाहिए l मजे की बात ये है कि राजा भईया का जब वास्तविक जन्मदिन 31अक्टूबर,1967 ही है तो वर्ष-1993 में जब राजा भईया प्रथम चुनाव में अपना नामांकन किया तो उसके मुताविक उनकी उम्र-26 वर्ष रही l बाद में वर्ष-2007 के नामांकन में राजा भैया की उम्र-33 वर्ष हो गई l यानि 1993 से 20 वर्ष बाद यानि वर्ष-2007 में राजा भईया की उम्र-26+20=46 होनी चाहिए थी,परन्तु वो घटाकर 33 वर्ष हो गई,जो वर्ष-2017 में महज 43 वर्ष ही है l ये कोई विपक्षी दलों के नेताओं का आरोप नहीं कि ईर्ष्या व द्वेष वश ये आरोप कोई विपक्षी लगा रहा है। 
वर्ष-2017में अपने नामांकन में हलफनामे में राजा भईया ने माना था कि वो 43वर्ष के हैं...
रघुराज प्रताप सिंह "राजा भईया" वर्ष-1993 और वर्ष-1996 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी समर्थित तो वर्ष-2002 और वर्ष-2007, वर्ष-2012 एवं वर्ष-2017 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधायक चुने गए। राजा भैया, बीजेपी की कल्याण सिंह सरकार और समाजवादी पार्टी की मुलायम सिंह की सरकार में निर्दलीय रहते हुए मंत्री भी बने। राजा भईया को वर्ष-1997 में भारतीय जनता पार्टी के कल्याण सिंह के मंत्रीमंडल में कैबिनेट मंत्री तो वर्ष -1999 व वर्ष-2000 में रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह के कैबिनेट में खेल कूद एंव युवा कल्याण मंत्री बनाया गया। वर्ष-2004 मुलायम सिंह यादव की सरकार में रघुराज प्रताप सिंह "राजा भईया" खाद्य एवं रसद विभाग के मंत्री बने। अखिलेश यादव की पूर्ण बहुमत की सरकार में 15 मार्च,2012 को राजा भईया को पुनः उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट में कारागार एवं खाद्य एवं रसद मंत्री बनाया गया, लेकिन 2 मार्च, 2013 को कुंडा में तिहरे हत्याकांड मामले में डीएसपी जिया-उल-हक की हत्या के मामले में राजा भईया का नाम आने पर उन्होंने 4 मार्च,2013 को मंत्री पद से इस्तिफा दे दिया।  
राजा भईया का 48 वां जन्म जिसे वो स्वयं समर्थकों संग मनाया... 

हालांकि बाद में सीबीआई के प्रारंभिक जाँच में ही राजा भईया निर्दोष पाए गए और क्लोजर रिपोर्ट में उन्हें क्लीन चिट मिल गई। सीबीआई की अंतरिम रिपोर्ट में राजा भईया को पूरी तरह क्लीन चिट मिल गयी और 11 अक्टूबर को उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार ने सम्मान सहित पुनः कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया l वर्ष-2017 चुनाव से पहले कई बार राजा भईया को भाजपा में जाने की अटकले समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी,परन्तु अंततः राजा भईया वर्ष-2017 का चुनाव निर्दलीय के रूप में सपा के समर्थन से जीत कर सदन में बने हुए हैं l भाजपा के प्रचंड बहुमत के बाद सूबे में योगी सरकार के गठन और मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ की शपथ के बाद से राजा भईया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाकात का निहितार्थ निकाला गया,परन्तु वो भी हवा हवाई ही साबित हुआ...!!!

rameshrajdar

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