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मंगलवार, 7 नवंबर 2017

पतियों के भरोसे वाली पत्नियां क्या चुनाव जीतने के बाद नगरपालिका बोर्ड का संचालन सुचारू रूप से करा पाएंगी...?

कैसे आगे बढ़ेगी नारी शक्ति...? 
पतियों का दामन थामकर चुनाव मैदान में उतरी महिलाओं को नही है,राजनीति की कोई जानकारी...!!!
नामांकन का आखिरी दिन...
नगर विकास में दोयम दर्जे में अपना नाम अंकित कराने वाली प्रतापगढ़ की नगरपालिका का कल नामांकन का अंतिम दिन रहा और आज सभी उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच हुई जिसमें सभी नामांकन पत्र बैध पाए गए l सूबे में निकाय चुनाव की घोषणा के बाद प्रतापगढ़ में निकाय चुनाव प्रथम चरण में होना निश्चित हुआ l सबसे मजे की बात ये रही कि राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद राजनीतिक दलों में उम्मीदवारों की उम्मीदवारी तय करने में पार्टी पदाधिकारियों के छक्के छूट गए l ये स्वस्थ लोकतंत्र के लिए राजनीतिक दलों के लिए किसी तमाचे से कम नहीं रहा l शर्म आनी चाहिए राजनीतिक दलों के आकाओं को कि वो जब नामांकन आधा खत्म हो जाता है तो अपना उम्मीदवार तय करते हैं l क्या जनता राजनीतिक दलों द्वारा तय किये गए उनके उम्मीदवार के प्रति मतदान करने के लिए बाध्य है ? ये तो राजनीतिक दलों द्वारा एक तरह की तानाशाही है कि जिसे वो अपना उम्मीदवार तय कर दें,मतदाता उसे ही अपना भाग्य विधाता बना ले l क्योंकि राजनीतिक दल ये मानते हैं कि उनके उम्मीदवार के पास संगठन का वोटबैंक तो है और निर्दलीय उम्मीदवारों के पास संसाधन सहित शून्य स्तर से उसे मेहनत करनी होगी l लिहाजा मतदाता अन्ततोगत्वा मजबूर होकर अपना मतदान उसके द्वारा तय किये गए उम्मीदवार को ही करेगा l  
प्रतापगढ़ नगरपालिका का आरक्षण इस बार महिला सीट के रूप में हुआ तो राजनीतिक दलों में कैडर वाली महिला नेत्रियां इस उम्मीद में थी कि उनकी पार्टी उन्हें अपना उम्मीदवार जरूर बनायेगी l परन्तु ऐसा न हो सका l सबसे अधिक मारामारी भाजपा में नपाध्यक्ष पद के लिए थी और उसके बाद समाजवादी पार्टी में थी l सपा इस फिराक में थी कि पहले भाजपा अपना उम्मीदवार तय दे तो वो अपना उम्मीदवार तय करे l इस नूराकुश्ती से तंग आकर समाजवादी पार्टी ने अपना कैडर वाला उम्मीवार महिमा गुप्ता को चुनावी मैदान में उतार तो दिया,परन्तु भाजपा के उम्मीदवार पर अपनी गिद्ध रूपी नजर गड़ाए हुए थी l सपा का मानना था कि यदि भाजपा अपने महिला नेत्री जो कैडर की है,उसे चुनावी मैदान में उतारती है तो उसके लिहाज से उसका उम्मीदवार अपने आप में परफेक्ट है और यदि भाजपा अपने पार्टी के धनपशुओं वाले उम्मीदवार की पत्नी को टिकट देती है तो वह भी अपना उम्मीदवार बदल देगी l चूंकि समाजवादी पार्टी में पूर्वमंत्री प्रो.शिवाकांत ओझा,पूर्व विधायक नागेन्द्र सिंह मुन्ना यादव,एम एल सी अक्षय प्रताप सिंह "गोपाल जी" सहित सपा महासचिव इरशाद सिद्धिकी महिमा के टिकट से संतुष्ट नहीं थे l 
अलग-अलग अंदाज में उम्मीदवार 
सपा के इन दिग्गजों को लगता था कि भाजपा के उम्मीदवार के आगे उनकी उम्मीदवार चुनाव मैदान में कमजोर पड़ जायेगी l सो पार्टी मुखिया को यथास्थिति से अवगत कराया l सपा पहले से मन बनाकर बैठी थी कि भाजपा से टिकट की चाहत रखने वाले हरीप्रताप, रामकृष्ण मिश्र एवं संतोष मिश्र अपनी पत्नियां हैं l इनमें से किसी एक का टिकट होता है तो वह शेष दो उम्मीवारों में से एक को अपना उम्मीदवार बना लेगी l समाजवादी पार्टी ने किया भी वहीं l जैसे ही भाजपा ने अपने उम्मीदवार के रूप में धनपशु हरिप्रताप सिंह की पत्नी प्रेमलता का टिकट फाइनल किया तो समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी सक्रिय हो गए और रामकृष्ण मिश्र की पत्नी गीता मिश्र के नाम पर सहमति बनाते हुए पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव से सम्पर्क किया,जिसके बाद पूर्व की उम्मीदवार महिमा गुप्ता जो अपना नामांकन कर चुकी थी,उनका टिकट काटकर गीता मिश्रा को अपना उम्मीदवार बना दिया l 
राजनीतिक दलों की उम्मीदवारी तय होने तक नामांकन के 5 दिन बीत गए थे l चुनाव में सभी दलों ने अपनों पर भरोसा नहीं किया l ज्यादातर दल बदल के महारथी लोंगो पर राजनीतिक दलों ने अपना भरोसा जताया और उन्हें ही गले लगाकर अपना उम्मीदवार बनाया । भाजपा की बात करें तो विधान सभा चुनाव-2017 में कांग्रेस का दामन थामने वाले और वहां से टिकट न मिलने की दशा में पुनः कांग्रेस से भाजपा में पहुंचे निवर्तमान चेयरमैन हरीप्रताप सिंह की पत्नी प्रेमलता को भाजपा ने टिकट दिया l भाजपा से टिकट न मिलने पर सपा की सदस्यता लेने वाले रामकृष्ण मिश्र उर्फ गुड्डू मिश्र की पत्नी व वरिष्ठ बीजेपी नेता उदयराज मिश्र की छोटी बहू गीता मिश्रा को सपा ने अपना उम्मीदवार बनाते हुए नामांकन के अंतिम दिन उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है l भाजपा से कांग्रेस का दामन थामने वाले पूर्व सभासद रामशंकर जायसवाल की पत्नी उर्मिला जायसवाल पर कांग्रेस ने जहाँ भरोसा जताया है।
दिलचस्प हुआ निकाय चुनाव-2017
भाजपा से बसपा में पहुंचे संतोष जैन की पत्नी राखी जैन को अंत में बसपा ने अपना उम्मीदवार बना लिया l जबकि सपा से पहले बतौर कैडर उम्मीदवार महिमा गुप्ता का टिकट भईयाराम पटेल और सपा से बसपा और फिर बसपा से सपा में पहुंचे पूर्व सांसद सी एन सिंह की पैरवी पर प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने किया था l महिमा ने अपना नामांकन भी कर लिया था l टिकट कटने के बाद भी जब महिमा गुप्ता निर्दलीय अपना नामांकन भरने नामांकन कक्ष पहुंची तो उनका लिवास बदला था,जिससे एक बार में लोग उन्हें पहचान नहीं सके l वो हिन्दू होते हुए भी साड़ी से अपना घूँघट न कर बुर्का अपने तन पर डाल रखी थी,जिससे कुछ देर तक मौजूद लोग असमंजस में रहे l बाद में पोल खुलने के बाद महिमा गुप्ता खुद ही मीडियाकर्मियों से मिलकर अपनी पीड़ा ब्यक्त की l महिमा गुप्ता के साथ पूर्व सांसद सीएन सिंह एवं सपा जिलाध्यक्ष भईयाराम पटेल नामांकन कक्ष से लेकर कचेहरी परिसर तक बराबर नजर आये l
वहीं भाजपा के टिकट से कई बार नगरपालिका की वार्ड सदस्य रही माधुरी सिंह भी भाजपा से नगरपालिका अध्यक्ष पद का टिकट मांग रही थी,टिकट न मिलने से बगावती तेवर अपनाते हुए नपाध्यक्ष पद का नामांकन निर्दल के रूप में दाखिल किया है। भाजपा से पहले विधान सभा का टिकट मांगने और न मिलने पर मन मसोस कर बैठ जाने के बाद इस बार नगरपालिका चुनाव लड़ने का मंसूबा पाले विहिप नेता विजय सिंह जब महिला सीट सुरक्षित हुई तो वो अपनी पत्नी प्रियंका को नपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव मैदान में निर्दलीय उतारा है l आम आदमी पार्टी से पूनम उपाध्याय को पार्टी ने उतारा है,वो आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी दिनेश उपाध्याय की पत्नी है l कई बार से सभासद रहे मुहीबुल आरफीन उर्फ पप्पू भाई ने अपनी पत्नी को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नपाध्यक्ष पद के लिए उतारा है l उनकी उम्मीदवारी से नपाध्यक्ष पद के लिए जीतने वाले उम्मीदवारों की धड़कने बढ़ गई हैं l चुनावी गुणा-गणित का समीकरण समझने वाले ये कहने लगे हैं कि पप्पू भाई स्वयं सभासद का निर्वाचन किये हैं और अपनी पत्नी को अध्यक्ष पद के लिए नामांकन किये हैं l यदि मुस्लिम बाहुल्य वार्डों में वो सेंधमारी करते हैं तो चुनावी वैतरणी पार करने वाले के लिए वो मुसीबत खड़ी कर चुनावी समीकरण बिगाड़ने का कार्य कर सकते हैं l बसपा में टिकट की कोई मारामारी न होने के चलते बसपा ने काफी मशक्कत की परन्तु अन्य कोई दमदार और धनपशु टिकटार्थी न मिलने की दशा में पहले से नामांकन करने वाली राखी जैन पर ही भरोसा जताकर उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है l हालांकि कांग्रेस से उर्मिला जायसवाल,भाजपा से प्रेमलता और सपा से गीता की तरह राखी जैन और प्रियंका की भी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है।

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