भाजपा संगठन में आंतरिक कलह खुलकर आई सामने

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प्रतापगढ़ में भाजपा कार्यालय पर निकाय चुनाव-2017हेतु प्रदेशध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पाण्डेय केन्द्रीय कार्यालय का फीता काटते हुए....
  डॉ महेंद्र नाथ पाण्डेय केन्द्रीय कार्यालय का फीता काटते हुए....
सूबे में योगी सरकार निकाय चुनाव कराने के लिए आगे-पीछे कर रही थी कि GST और कानून ब्यवस्था में अपेक्षित बदलाव न होने से जनता अपनी नाराजगी में निकाय चुनाव कहीं भाजपा को हरा न दें न न करते किसी तरह कोर्ट की डर से निकाय चुनाव कराने के लिए सरकार में नौकरशाही को इधर-उधर कर और भाजपा संगठन में एक चेहरा ऐसा जो सबको स्वीकार हो,उसे लाने का प्रयास किया गया। वो चेहरा डॉ महेंद्र नाथ पाण्डेय का रहा उन्हें मोदी सरकार से छुट्टी कर प्रदेश की कमान सौंपी गई। विधानसभा चुनाव से स्थिति बिलकुल विपरीत निकायों पर विगत ढाई दशक से भाजपा का ही कब्ज़ा रहा है। शहरी चुनाव में बुद्धिजीवी लोग अधिक होते हैं। भाजपा पर विधानसभा चुनाव की तरह निकाय में भी टिकट बेंचने का आरोप लगा। इस बार भी आरोप लगाने वाले फिर वही उम्मीदवार रहे। अंतर सिर्फ इतना ही रहा कि 10 माह पहले विधान सभा टिकट काटने पर 3बार विधान सभा और 3बार नगरपालिका अध्यक्ष का टिकट पाने वाले हरि प्रताप सिंह टिकट बेंचने का आरोप लगाकर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। जनता सोच रही है कि इस बार हरि प्रताप सिंह इस बात का खुलासा करेंगे कि उनकी पत्नी प्रेमलता को जो टिकट भाजपा ने दिया वो कितने में उन्होंने खरीदा...??? 
 BJPकार्यालय के बाहर बने मंच पर मंचासीन भाजपाई...
चूंकि जिले में निकाय चुनाव में टिकट बेंचने का आरोप लगा। सभासद और अध्यक्ष पद दोनों का टिकट बेंचने का आरोप खुद सम्भावित उम्मीदवारों द्वारा लगाया गया। जिसकी पुष्टि इस बात से भी हो जाती है कि भाजपा के जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश त्रिपाठी का चार्ज सीज कर दिया गया और सभासद के टिकट पर फार्म-7A और 7B पर निकाय प्रभारी काशी तिवारी के हस्ताक्षर से सभासद का टिकट दिया गया। प्रतापगढ़ में निकाय चुनाव के टिकट बंटवारे से संभावित उम्मीदवार इतने नाराज हुए कि सभासद का दिए गए टिकट को लात मारकर निर्दलीय उम्मीदवार होकर चुनावी कुरुक्षेत्र में ताल ठोंक रहे हैं । भाजपा प्रदेशध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पाण्डेय जब कल भाजपा कार्यालय पहुंचे तो मंच पर कई भाजपा दिग्गज नदारद दिखे और आशा के मुताविक भीड़ भी मौजूद नहीं थी,जिसे लेकर दिन भर चर्चा होती रही। हलांकि डॉ पाण्डेय जी ने भाजपा का संकल्प पत्र सार्वजनिक करते हुए निकाय में भाजपा की जीत विधान सभा की तरह होने की बात दोहराई। प्रदेशध्यक्ष की दावे की पोल इसी से खुलती नजर आ रही है कि इस चुनाव में भाजपा संगठन ही अपने उम्मीदवार से संतुष्ट नहीं है और न उम्मीदवार ही भाजपा के संगठन से संतुष्ट है। इसकी प्रमाणिकता इस बात से तय हो जाती है कि भाजपा संगठन के वो पदाधिकारी जिनके कहने पर सौ पचास मत उसकी झोली में आ सकता है,वो पदाधिकारी निकाय चुनाव में पूंछा ही नहीं जा रहा है। 
मंच पर भी दिख गई गुटबाजी...
वजह भी स्पष्ट है कि आज भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जिसे अपना उम्मीदवार बनाया वही पिछली बार निकाय चुनाव वर्ष-2012 में भाजपा ने जब उनका टिकट काटा तो वो पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव मैदान में कूद पड़े थे, तब यही हरि प्रताप सिंह भाजपा संगठन में सेंधमारी करते हुए भाजपा पदाधिकारियों को विभीषण बनाकर अपना चुनाव निकालने में सफलता अर्जित किये थे यानि भाजपा शीर्ष नेतृत्व को शिकस्त देने का कार्य किया था,जिसकी शिकायत उम्मीदवार रहे रवि प्रताप सिंह ने भाजपा शीर्ष नेतृत्व से किया था,परन्तु ऊपर बैठे पदाधिकारी हारे हुए उम्मीदवार की बात को तवज्जो नहीं देते। वही डर इस बार नपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार (प्रेम लता सिंह और उनके पति जो राजनीति में हर दांव चलने के महारथी हैं) के लिए मुसीबत बन चुकी है। डॉ पाण्डेय जी को बुलाकर नाराज ब्राह्मणों को मनाने की पहल समझा जा रहा था,परन्तु ये दांव उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। ब्राह्मण ऐसे व्यक्ति के कहने पर क्यों बहके...??? मंच पर वक्ताओं के बयान को कोड किया जाए तो भाजपा के मंच से भाजपा के उम्मीदवार पर ही सवाल खड़ा करना भी भाजपा के आंतरिक कलह का एक ठोस आधार होगा...!!! 

rameshrajdar

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