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सोमवार, 2 अक्तूबर 2017

श्रीराम लीला समिति के पदाधिकारियों में नहीं जा रहा पदनाम का मोह

नगरपालिका परिषद् बेला प्रतापगढ़ के अध्यक्ष के रूप में श्रीराम लीला समितिप्रतापगढ़ के पदाधिकारियों ने आमंत्रण कार्ड में हरि प्रताप सिंह के नाम का किया है,उल्लेख...!!!
अगस्त को हरि प्रताप सिंह का कार्यकाल खत्म हुआ तो किस अधिकार से श्रीराम लीला समिति,प्रतापगढ़ हरि प्रताप सिंह को नपाध्यक्ष का दियाअधिकार...???
ये चापलूसी नहीं तो और क्या है...???
नाम और शोहरत के लिए इंसान दिन रात परेशान रहता है l ऐसा ही वाकिया चिलबिला के काबिल और ऊर्जा से भरपूर युवाओं में देखने को मिला l प्रतापगढ़ में दशहरा के एक दिन बाद भरत मिलाप का ऐतिहासिक मेला कई वर्षों से होता आ रहा है l नगरपालिका क्षेत्र में वैसे तो 25 वार्ड हैं, परन्तु चिलबिला पूर्वी और चिलबिला पश्चिमी एवं महुली वार्ड में ब्यापारियों का अपना अलग प्रभाव है l चौक घंटाघर पर भरत मिलाप के दिन पूरे जनपद से लोग एकत्र होकर मेले का आनन्द उठाते थे l जिले के अतिरिक्त पड़ोसी जनपदों से बहुत लोग भरत मिलाप में सिरकत करते हैं,परन्तु श्रीरामलीला समिति,प्रतापगढ़ में कुछ राजनीतिक लोग अपना प्रभाव बनाने के लिए उसमें इंट्री कर ली और चिलबिला और महुली से जुड़े लोंगो को निकाल बाहर किया तो इस अपमान का बदला लेने के लिए चिलबिला के युवाओं ने विगत चार वर्ष पूर्व विना शोर मचाए भरत मिलाप के दिन चिलबिला में अलग से भरत मिलाप कर श्रीरामलीला समिति,प्रतापगढ़ के पदाधिकारियों के सामने एक लकीर खींच दी कि यदि चिलबिला और महुली के लोंगो का तिरस्कार किया जाएगा तो उस तिरस्कार के बदले वो अपना भरत मिलाप मेले का आयोजन अलग कर लेंगे l 
राजेंद्र कुमार मौर्य,नपाध्यक्ष हरि प्रताप सिंह अब पद पर नहीं रहे। फिर भी ये और इनके चाटुकार अलख जगाए हैं...
जिम्मेवार की सूची बड़ी फिर भी भयानक चूक...
श्रीरामलीला समिति,प्रतापगढ़ के संरक्षक रहे स्व.महादेव केसरवानी को उक्त बात की जानकारी हुई तो उन्होंने इसका विरोध कर चिलबिला के उन युवकों पर मुकदमा लिखवा दिया जो बिना रजिस्टर्ड संस्था के एक ही दिन प्रतापगढ़ के ऐतिहासिक भरत मिलाप में खलल यानि विघ्न पैदा कर चिलबिला में अलग से भरत मिलाप कराया। फिलहाल बाद में दोनों गुटों में बैठक हुई और अंदर का मलाल निकाल मामले को खत्म कर दिया गया। परंतु मान मनौवल होने के बाद भी चिलबिला के उन युवकों ने अपनी एक अलग संस्था बना डाली। संस्था के नाम में लेशमात्र का सिर्फ नाम में संशोधन किया। नई संस्था का नाम श्रीरामलीला सेवा समिति,चिलबिला,प्रतापगढ़ रखा गया l उक्त रजिस्टर्ड संस्था जो विगत 3 वर्ष पहले श्रीरामलीला समिति प्रतापगढ़ के पदाधिकारियों से नाराज होकर नई संस्था के रूप में बनाई गई और उसके पदाधिकारी अपने नाम का उल्लेख स्वयं किये हुए हैं। पहली बार बिना किसी सूचना के बिना रजिस्टर्ड संस्था के ही चिलबिला के ऊर्जावान युवकों ने भरत मिलाप का आयोजन चिलबिला का अलग से कराकर अपना वजूद प्रतापगढ़ की सबसे पुरानी संस्था श्रीरामलीला समिति,प्रतापगढ़ के पदाधिकारियों को बता दिया कि बिना चिलबिला के सहयोग के भरत मिलाप सम्भव नहीं है...!!!
विगत 3 वर्षों से दोनों समितियों में एक सहमति बनी की दोनों संस्था के पदाधिकारियों द्वारा भरत मिलाप मेले के आयोजन में अपना-अपना सहयोग अपने-अपने ढंग से कर भरत मिलाप के ऐतिहासिक मेले के आयोजन को सफल बनायेंगे l दोनों संस्था के पदाधिकारी अलग-अलग चंदा वसूलते हैं और अलग-अलग आमंत्रण कार्ड भी छपवाते हैं l दोनों संस्थाओं में एक समानता और देखने को मिली l श्रीरामलीला समिति,प्रतापगढ़ और चिलबिला की नई संस्था श्रीरामलीला सेवा समिति, चिलबिला,प्रतापगढ़  के पदाधिकारियों ने अपने-अपने आमंत्रण कार्ड में चाटुकारिता वश अथवा अज्ञानता वश कुछ लोगों के नाम के आगे उनके पदनाम को भी छपवाया l वो आमंत्रण कार्ड छपवाते वक्त भूल गए कि जिसका पदनाम छपवाया जा रहा है, क्या ये वर्तमान में उस पद पर आरूढ़ है...??? दोनों समितियों के पदाधिकारियों ने सब गुड़ गोबर कर दिया। इससे यही प्रतीत होता है कि दोनों नई और पुरानी समितियों में जानकार लोंगो को समिति में स्थान नहीं दिया जाता l एको अहम, द्वितीयोनास्ति वाली भावना से दोनों समितियों के पदाधिकारीगण ग्रसित हैं... !!!

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