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रविवार, 29 अक्तूबर 2017

प्रतापगढ़ नगरपालिका क्षेत्र में 10 वर्षो से रुका,सीवर लाइन का कार्य फिर से हुआ शुरू

अंधेर नगरी,धमधूसर राजा । टका शेर भाजी,टका शेर खाजा...!!!
करोड़ो रूपए हजम और जो बचे हैं,उसे भी हजम करने की तैयारी...
सरकार चाहे जिस राजनीतिक दल की हो,परन्तु भ्रष्टाचारी सभी दलों में अपना रसूख बनाये रखते हैं. वर्षों से नगरपालिका क्षेत्र में सिर्फ 25 वार्ड हैं.निकाय चुनाव से पहले नपाध्यक्ष नगरपालिका का सीमा विस्तार करने का दंभ भरते हैं और चुनाव नजदीक आने पर बिल्ली की तरह दुपक कर बैठ जाते हैं. वोट बैंक के मकड़जाल से 20 वर्षों से नगरपालिका के अध्यक्ष पद पर कुंडली मारकर बैठने वाले हरि प्रताप सिंह को परिसीमन विस्तार में जैसे उन्हें सांप सूंघ जाता हो. जिलाधिकारी और मंडलायुक्त की आख्या से अलग हटकर नगरपालिका की बोर्ड की बैठक में सीमा विस्तार न करने की दलील भेजकर इस बार भी नगरपालिका का सीमा विस्तार होने से प्रतापगढ़ को वंजित करने में पूर्व नपाध्यक्ष सफल रहे. 
10 वर्ष बाद कच्छप गति से टूटी पाईप को खपाने में जूता जल निगम
महज चंद मिनट की बरसात में शहर तालाब की शक्ल में नजर आने लगता है. जब नगरपालिका में सीवर लाइन बिछाई जा रही थी तो लोंगो ने सोचा कि अब जल्द ही बरसात के दिनों में जलभराव से शहरियों को निजात मिल जायेगी. उन्हें इस बात का ज्ञान नहीं था कि ये शहर में लैट्रिन की गन्दगी को बहाने के लिए है न कि बरसात के पानी को बहाने के लिए. सई नदी के दक्षिण यानि नगरपालिका के 6 वार्डो को छोड़कर शेष 19 के लोंगो की लैट्रिन की गन्दगी सीधे इस सीवर लाइन से बहते हुए सई नदी के किनारे बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में जाकर एकत्र होगा और वहां से उसे साफकर पानी को सई नदी में गिरा दिया जाएगा और शेष अवशेष को खाद्य बनाकर उसे बेंचने का ढिढोरा जल निगम द्वारा पीटा गया था,जो 10 वर्षो में तो फलीभूत नहीं हो सका. हाँ,शहरियों को सीवर लाइन की खुदाई और उससे टूटी सड़के व मिट्टी से लोंगो का जीना भले ही दुश्वार हुआ. 
 जलनिगम की माया कहीं धूप कहीं छाया...
नपाध्यक्ष अपनी दुश्मनी निकालने के लिए ये सीवर ट्रीटमेंट प्लांट जानबूझकर डॉ आर के सिंह,मानवतन नर्सिंग होम के बगल सई नदी के तट पर खाली पड़ी जमीन के विक्रेताओं को औने-पौने दाम देकर उक्त भूमि के बैनामे में खरीददारी के वक्त विक्रेताओं से एक फिक्स धनराशि पर डील कर जमीन का सौदाकरते हुए बाद में उन्हीं विक्रेताओं से लाखों रूपए वापस लेकर एक लम्बा खेल कर लिया गया. सीवरेज ट्रीटमेंट में लगाई गयी सभी मशीने वारंटी के बाहर हो चुकी हैं और उसको जंग खा लिए हैं. जो सीवर लाइन में पाइप बिछाई गयी वो थर्ड क्वालिटी की रही और जो अब बिछाई जा रही है वो पहले से ही डैमेज है. ऐसे में सिर्फ कार्य कराने का कोरम पूरा किया जा रहा है,ताकि बचा हुआ भुगतान भी हजम किया जा सके.सीवर लाइन चले या न चले इससे जल निगम और नगरपालिका का कोई सरोकार नहीं है. बाद में शहरियों से गृहकर और जलकर की तरह सीवरेज में आए सम्पूर्ण खर्च की वसूली कर ली जायेगी.यही इसकी हकीकत है. जो ब्यवस्था में बैठे सभी लोग जानते हैं और अपना हिस्सा लेकर चुप रहने में अपनी भलाई समझते हैं...!!!
10वर्ष की पुरानी पाइप जिसका मुंह पहले से टूट चुका हो,उसे प्रतापगढ़ नगरपालिका क्षेत्र के सीवर लाइन में इस्तेमाल किया जा रहा है... 

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