जीवन में स्वीकार करने वाला यथार्थ सत्य

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ये कटु सत्य है कि प्रत्येक व्यक्ति में 100% बुराई नहीं हो सकती। हां,ऐसा हो सकता है कि किसी के  जीवन में बुराइयाँ कुछ अधिक हों,परंतु शत प्रतिशत बुराइयाँ ही हों ऐसा किसी के जीवन में संभव नहीं है। कोई न कोई अच्छाइयाँ प्रत्येक व्यक्ति में होती हैं,चाहे 1% ही हो। जब किसी बुरे व्यक्ति में कोई अच्छाई दिखाई दे तो उसे अपनाने में कोई बुराई नहीं है,क्योंकि वह अच्छाई उसकी नहीं है,वह तो ईश्वर की दी हुई है। हाँ,उसके जीवन में जो बुराइयाँ हैं,उनका जिम्मेदार वह व्यक्ति स्वयं है तो उसकी बुराइयाँ ना अपनाएं,परंतु ईश्वर की दी हुई अच्छाई आप धारण कर सकते हैं...!!!  

rameshrajdar

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