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रविवार, 29 अक्तूबर 2017

देश के निर्वाचन ब्यवस्था में दोहरा मापदंड

आज रिटर्निंग कक्ष से निकाय चुनाव के प्रथम चरण के नामांकन हेतु प्रपत्रों की बिक्री हुई शुरू...!!!  
सांसद और विधायक के नामांकन प्रपत्र नि:शुल्क और निकाय चुनाव में नामांकन प्रपत्र का मूल्य-200/रुपये होना लोकतान्त्रिक ब्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है...!!!
 लोकप्रतिनिधि अधिनियम-1951में निर्वाचन प्रक्रिया में दोहरा मापदंड 
निकाय चुनाव वर्ष-2017 का नामांकन प्रपत्र सरकारी प्रेस से प्रकाशित किया गया, दो दिन पूर्व राज्य निर्वाचन आयोग उ.प्र. द्वारा निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद आज रिटर्निंग कक्ष से निकाय चुनाव के उन जिलों में प्रथम चरण के नामांकन हेतु प्रपत्रों की बिक्री शुरू हुई। उम्मीदवारों को जो नामांकन प्रपत्र दिया जा रहा है,उसका निर्धारित मूल्य 200/रूपए रखा गया। हलांकि नामांकन प्रपत्रों को छपाई बहुत ही घटिया पेपर पर की गई है। ब्यवस्था जनित भ्रष्टाचार में राज्य निर्वाचन आयोग,उ.प्र.के अधिकारियों का कोई जोड़ नहीं हैउन्हें बोलने वाला कोई नहीं है जिस पेपर को 200/रूपए में बेंचा जा रहा है,उसकी कीमत 10/रूपए भी नहीं हैलोक प्रतिनिधि अधिनियम-1951 के तहत लोकसभा सदस्य /राज्यसभा सदस्य, विधान सभा सदस्य /विधान परिषद् प्रतिनिधियों के निर्वाचन में नामांकन प्रपत्र नि:शुल्क दिया जाता है और निकाय चुनाव में जनप्रतिनिधियों के निर्वाचन में 200/रूपए का शुल्क लेना किसी भी दशा में न्यायोचित प्रतीत नहीं होता...!!!
 खराब पेपर पर छापा गया निकाय चुनाव का नामांकन प्रपत्र 

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