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रविवार, 14 अगस्त 2016

!!!....देश के नागरिक का प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र....!!!

देश के नागरिक का प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र....!!!


देश के प्रधानमन्त्री को मैं ब्यक्तिगत रूप से तब से पसन्द करता हूँ, जब से उन्हें जानता हूँ । उनके विचार और सोच का प्रसंशक भी हूँ । मोदी जी की प्रत्येक अभिब्यक्ति नजदीक से समझता हूँ । परन्तु गो रक्षा पर दिए उनके बयान से पूरी तरह सहमत नहीं हूँ । गोरक्षक 80 फीसदी अपराधी होते हैं । गो रक्षा का चोला ओढ़कर अपने अपराध को छिपाने का काम उनके द्वारा किया जाता है । मैं, देश के पी. एम. मोदी जी से ये स्पष्ट करना चाहता हूँ कि जब लोकतंत्र के मन्दिर में अपराधी प्रवित्ति के लोग पहुँच कर संसद को शर्मशार करते हैं तो उन्हें क्या कहेंगें...???
अपराधियों को पहले स्थान दिए जाने की कहीं परम्परा है तो वह राजनीतिक दल ही है l सभी राजनीतिक दलों में अपराधियों की एक जमात है, राजनीतिक दल के मुखिया उस अपराधी के विरुद्ध किसी भी तरह की कारवाई से बचते नजर आते हैं, वशर्ते वो विधान सभा और लोकसभा की सीट जीत सके और अन्य उम्मीदवारों को भी जिता सके । पी एम महोदय, उन्हें क्या कहेंगें ? उनके चोले के बारे में भी देश की जनता को बताते तो अच्छा लगता । 80 फीसदी अपराधी विधान सभा / विधान परिषद एवं लोकसभा/राज्यसभा के निर्वाचित सदस्यों के संपर्क में रहते हैं । उनका संरक्षण उन अपराधियों के सिर पर रहता है । 50 फीसदी अपराधी उनके सरकारी आवासों में पनाह लेते हैं । फिर किसमें दम है कि उनके ऊपर शिकंजा कसे ? इस पर देश की जनता पी एम महोदय आपकी राय जानना चाहती है ।
कालीकोट पहनकर न्याय के मन्दिर में भी 80 फीसदी लोग अपराधी प्रवित्ति के घुसे हैं । उनके विषय में भी मोदी जी, अपनी राय दीजिये । समाज को आईना दिखाने वाली जमात यानि मीडिया में भी 80 फीसदी अपराधी प्रवित्ति के लोग स्थान बनाए हुए हैं । पी एम महोदय, उनके बारे में भी दो शब्द बोल सकेंगें क्या ? इसी तरह हर जमात में अपराधी प्रवित्ति के लोग अपनी जड़े जमाए हुए हैं । गो रक्षा कोई अकेला क्षेत्र नहीं । साधु और सन्यासी और मौलानाओं सहित सभी धर्म के धर्म गुरुओं में भी अपराधी प्रवित्ति के लोग अपनी जड़े जमाकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं ।
आपने, गो रक्षा के लिए एक मूल मन्त्र दिया कि असल गो रक्षक मैं, उन्हें मानूंगा जो गायों को प्लास्टिक की पन्नियों को खाने से रोके । मुझे आपके इस बयान पर तरस आता है कि देश की सर्बोच्च कुर्सी पर बैठने वाला ब्यक्ति ऐसा बयान दिया । प्लास्टिक पन्नी पर प्रतिबन्ध होने के बाद धड़ल्ले से फैक्टरियों में उसका उत्पादन किया जा रहा है । क्या प्रतिबंधित पन्नियों का उत्पादन भी ये असली गो रक्षक रोकेंगें ? नगर क्षेत्र में तवेला संचालकों और गाय व भैंस पालने वाले लोग दूध निकालने के बाद उन्हें छुट्टा यानि खुला छोड़ देते हैं । वो सभी जानवर प्लास्टिक यानि प्रतिबंधित पन्नी खाकर अपनी भूख मिटाते हैं ।
प्रधानमंत्री जी, स्वच्छ भारत व स्वस्थ भारत का यदि कोई जनाजा निकाल रहा है तो वो यही पशुपालक हैं । सड़क से लेकर गलियों तक गन्दगी जो फैलती है, इसके जिम्मेवार यही हैं ।सिस्टम में बैठे लोंगों द्वारा कांजी हाउस तक को बेंच खाया गया । क्या इसकी भी जिम्मेवारी असल गो रक्षकों के कन्धों पर डालेंगें प्रधानमंत्री महोदय ? क्यों नहीं प्रतिबन्ध लगाते छुट्टा पशुओं और प्रतिबंधित पन्नियों के उत्पादन पर....??? आज मेरा जन्म दिन है । मैं,पी एम महोदय से अपने इस पोस्ट को उनके पास पहुंचा कर उनसे जन्मदिन के उपलक्ष्य पर इस अब्यवस्था पर कार्यवाही चाहता हूँ । केवल ये कहने से कि 80 फीसदी गोरक्षा की आड़ में अपना गोरखधंधा कर रहे हैं, काम चलने वाला नहीं है।
रमेश तिवारी "राज़दार" आर टी आई व सामजिक कार्यकर्ता प्रतापगढ़, उ. प्र.

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