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रविवार, 3 जुलाई 2016

।। तबेला संचालकों का आतंक ।।

              ।। तबेला संचालकों का आतंक ।।
स्वच्छ भारत, स्वच्छ भारत मिशन 
प्रतापगढ़ नगरपालिका क्षेत्र के 25 वार्डों में लगभग 100 भैंस व गाय के तबेलें हैं, जहां तबेला संचालकों तबेले की गन्दगी और गोबर समरसेबल पम्प से पानी डालकर सीधे नाली में गिरा दिया जाता हैं, जिससे नाली चोक यानि जाम हो जाती है । काफी मशक्कत के बाद ही सफाई कर्मियों द्वारा नाली की सफाई हो पाती है । ये सारी गन्दगी सई नदी में जाकर नदी के पानी को प्रदूषित कर देती है ।
भारत स्वच्छता अभियान को यदि कोई पलीता लगा रहा है, तो वो हैं तबेला संचालक l  स्वच्छ भारत, स्वच्छ भारत मिशन को असफल बनाने वालों केविरुद्ध ब्यवस्था में बैठे निकम्मे लोग कुछ भी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते l इनके अगल बगल के रहने वालों की जिंदगी विन तबेला के तबेला जैसी हो गई है । उन्हें संक्रामक रोग से खतरा बना रहता है l
घोषियों का इतना आतंक है कि इनके विरुद्ध कुछ भी बोलने की हिम्मत किसी में नहीं होती । सही मायने में नगरपालिका क्षेत्र के बाहर ही तबेला संचालन की अनुमति नगरपालिका को देनी चाहिए l वैसे तो नगरपालिका दो तरह के कर की ब्यवस्था बनाए हुए है l एक गृहकर और दूसरा जलकर l एक घरेलू दूसरा ब्यवसायिक l परन्तु इन तबेला संचालकों को कामर्शियल से पूरी तरह से छूट प्राप्त है l

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