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सोमवार, 18 जुलाई 2016

जाकिर नाईक असल में खलनायक है...!!!

जाकिर नाईक असल में खलनायक है...!!!

कथित धर्मगुरु का चोला ओढ़कर आतंकियों का करता है, ठेकेदारी.....!!!

जाकिर नाईक कथित धर्मगुरु       

डॉ. जाकिर नाईक को आप क्या कहेंगे? बांग्लादेश के ढाका में हमला करने वालों में से दो आतंकवादियों ने स्वयं को जाकिर का अनुसरक बताया था। बांग्लादेशी अखबार डेली स्टार में छपी खबर के अनुसार, ढाका हमले में मारे गए 6 आतंकियों में दो निब्रास इस्लाम और रोहन इम्तियाज जाकिर नाइक से प्रेरित थे। इम्तियाज ने पिछले साल जाकिर की तकरीर को फेसबुक पर शेयर भी किया था। यह खबर आने के बाद बांग्लादेश सरकार ने भारत से संपर्क किया है। बांग्लादश के न्यूज चैनलों ने जाकिर के तकरीरों की क्लीपिंग चलाना शुरू कर दिया। 
मात्र ये आतंकवादी ही उनसे प्रेरित नहीं हैं। अभी हैदराबाद में पकड़े गए आईएस के मॉड्यूल में से भी कुछ ने कहा है कि वो उनके तकरीर से प्रेरित हुआ। 2007 में ब्रिटेन के ग्लासगो हवाई अड्डे पर हमला करने की असफल कोशिश करने वाले कफिल अहमद भी इसके भाषण से प्रेरित हुआ था। अब तो सुरक्षा एजेंसियों ने यह खबर भी लीक किया है कि 11 जुलाई 2006 का मुंबई उपनगरीय रेलों पर हमला करने वालों में से राहिल शेख ने भी जाकिर से प्रभावित होने की बात कबूल की थी।तना कुछ सच हमारे सामने है और अब यूट्यूब से उसकी अनेक तकरीरें आ चुकी हैं जिनमें वो जहर उगल रहे हैं। 
जाकिर नाईक का तर्क देखिए। महानुभाव कह रहे हैं कि मोहम्मद पैगम्बर से बहुत लोग प्रभावित हो सकते हैं। अगर उन्होंने हिंसा कर दिया तो क्या यह कहा जाएगा इसके लिए मोहम्मद पैगम्बर दोषी हैं? वाह, क्या तर्क है। आतंकवादी सिर्फ वही नहीं होता जो हमला करता है। किसी के अंदर हमला करने का विचार पैदा करना, हमला करने को मजहब का काम बताने की विधारधारा फैलाना, आत्मघाती दस्ते तक का विचार कुरान में मान्य घोषित करने वाला उनसे कहीं बड़ा आतंकवादी हुआ, क्योंकि इसके विचार को लेकर न जाने कितने हमलावर भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान से लेकर दुनिया भर में पैदा हो चुके होंगे।  
जाकिर नाईक का किसी आतंकवादी से रिश्ता था या नहीं यह मायने नहीं है। उसकी तकरीरें आतंकवादी और दूसरे धर्मों से नफरत पैदा करतीं हैं इतना ही उनको काल कोठरी में डालने तथा सजा दिलाने के लिए पर्याप्त होना चाहिए। वेसे भी 2008 से जमात उद दावा के वेबसाइट से जाकिर के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन का लिंक जुड़ना यूं ही नहीं हो सकता।हमारा देश कैसा है जरा इसका प्रमाण देखिए। उत्तर प्रदेश के मंत्री आजम खान ने कुछ बयान दिया जिससे हिन्दू महासभा का एक कार्यकर्ता कमलेश तिवारी प्रतिक्रिया में आकर फेसबुक पर मोहम्मद पैगम्बर के बारे में कुछ लिख दिया। 
उसे उत्तर प्रदेश सरकार ने बिना देरी किए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया। बावजूद इसके उसके खिलाफ चारों ओर प्रदर्शन होने लगा, यहां तक कि मालदा से लेकर किसनगंज तक में हिंसा व आगजनी भी हुई। उसके जेल में होने के बावजूद एक महीने से ज्यादा तक सड़कों पर बावेला होता रहा। उसको गिरफ्तार करने के पहले कोई जांच नहीं हुई। लेकिन जाकिर के मामले में केन्द्र सरकार कह रही है कि उनके भाषणों की जांच होगी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने मुंबई पुलिस से जाकिर नाइक के सार्वजनिक हुए भाषणों, दस्तावेजों की जांच करने को कहा है। 
भारत की जनता को देखिए। उसके खिलाफ कोई बड़ा वास्तविक आक्रोश प्रदर्शन नहीं जिनसे सरकारें दबाव में आएं, उन्हें लगे कि अगर इसे गिरफ्तार कर सख्त धाराएं नहीं लगाईं, इसकी संस्था को बंद नहीं किया तो फिर कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है। तो इतना गुणात्मक अंतर है दो मामलों में।उनके भाषण के जो अंश टेलीविजन के माध्यम से सुनाए जा चुके हैं उनको उद्धृत करना यहां आवश्यक नहीं। बावजूद दो तीन का उल्लेख आवश्यक है।वह कहते हैं कि ओसामा बिन लादेन अगर अमेरिका पर आतंकवादी हमला करता है तो वह एक आतंकवादी को आतंकित करता है। पता नहीं सच कितना है मैंं नहीं जानता लेकिन ऐसा करता है तो हम उसके साथ है। 
आतंकवादी को हर मुसलमान से आतंकित होना चाहिए और इस मामले में हर मुसलमान को आतंकवादी होना चाहिए। इसमें कुछ बातें जोड़कर वे अपने बचने का रास्ता भी निकालते रहते हैं, क्योंकि एमबीबीएस हैं, समझ है कानून से कैसे बचा जाए….। वे कहते हैं कि आत्मघाती होना हराम है। लेकिन अंतिम अवस्था में जब यह पता हो कि हमें मरना है तो फिर वहां आत्मघाती बनकर मारने की इजाजत कुरान देता है। वह तालिबानों का समर्थन करते हैं। तालिबानों द्वारा बामियान बुद्ध की मूर्ति तोड़ने का यह कहते हुए समर्थन करते हैं कि उसने तो बौद्धों की ही मदद की, क्योंकि बौद्ध धर्म में मूर्ति पूजा की मनाही है। 
जाकिर समाज में घृणा और दूसरे धर्म से द्वेष भी पैदा करते है। वे कहते है कि कोई हिन्दू यदि हमें गणपति उत्सव में आमंत्रित करता है और खाने के लिए प्रसाद देता है तो वह हमारे लिए हराम है….मरा हुआ गोश्त… खून….। इसके लिए कुरान की आयतें दुहराते हैं। गणेश जी की उत्पत्ति पर प्रश्न खड़ा करते हैं। गाय खाने को कुरान का आदेश ही नहीं, यजुर्वेद में इसकी अनुमति की बात कर देते हैं।इस प्रकार जाकिर के तकरीर को देखें तो न केवल उसमें आतंकवादी बनाने का सशक्त विचार प्रभाव है, दूसरे धर्म खासकर हिन्दू धर्म से नफरत और उसे हीन मानने तथा उसके विरुद्ध व्यवहार करने की प्रेरणा है। 
दूसरे धर्म के प्रति नफरत फैलाना भी कानूनन अपराध है और उस व्यक्ति को इसके लिए भी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है। न जाने कितनों को उसने सांप्रदायिक विद्वेष और नफरत से भर दिया होगा। कितने को मनोवैज्ञानिक रुप से दंगाई बना दिया होगा। लेकिन जरा सोचिए, एक व्यक्ति इतने लंबे समय से हमारे देश में तकरीरें कर रहा है और उसके खिलाफ कहीं कोई विरोध प्रदर्शन नहीं। उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं। कोई मुकदमा नहीं। आखिर कैसा है हमार देश? 
अगर बांग्लादेश में हमला नहीं होता और उसमें उसका नाम नहीं आता तो फिर हमारा या सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान उसकी ओर जाता ही नहीं। इससे आश्चर्य और चिंता दोनों पैदा होता है। इसलिए कि भारत आतंकवाद के शीर्ष रडार पर है। आईएस, अल कायदा से लेकर पाकिस्तान स्थित लश्कर ए तैयबा,जैश ए मोहम्मद आदि सभी संगठन हमारे यहां हमला करने की साजिशें रच रहे हैं। कहा जा रहा है उन पर हमारी खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर है और उनके मॉड्यूल पकड़े जा रहे हैं। किंतु हमारे ही देश में खुलेआम कोई व्यक्ति इस तरह अपनी लंबी तकरीरों से हिंसक जेहाद की प्रेरणा देता है,हिन्दू धर्म के खिलाफ नफरत फैलाता है और वह सबकी आंखों से बचा हुआ है। क्यों? 
अगर अमेरिका या ब्रिटेन या कनाडा ने उस व्यक्ति को अपने देश में प्रतिबंधित किया तो उसकी खबर भारत को नहीं मिली? अगर मिली, जो कि निश्चित है तो यहां गहराई से जांच कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?इसका एक जवाब तो यह हो सकता है कि जब कांग्रेस पार्टी का कोई बड़ा नेता यानी दिग्विजय सिंह के स्तर का नेता मंच पर उसे गले लगाता है,उसे शांति दूत कहता है,उसे कहता है कि हिन्दू मुसलमानों के बीच एकता का काम आपको करना है तो फिर कोई अधिकारी उस शासनकाल में उस पर हाथ कैसे डालता। 
हालांकि तब भी मुंबई में बढ़ती परेशानियों को देखते हुए वहां की पुलिस ने 2012 से उसकी कोई सार्वजनिक सभा नहीं होने दी। किंतु इसके आगे की कार्रवाई के लिए शायद पुलिस के हाथ बंधे थे। यह खतरनाक स्थिति है। आतंकवाद से लड़ने में भी हमारे यहां राजनीति होती है। जाकिर की आवाज में वोट भी तो है जिसके लिए उसके सात खून माफ। यह राजनीति देशविरोधी है और इसका आक्रामक विरोध किया जाना चाहिए। कम से कम वर्तमान केन्द्र एवं महाराष्ट्र की प्रदेश सरकार के अवसर है दिखाने का कि वह धर्म के नाम पर ऐसी नफरत तथा आतंकवाद की विचारधारा फैलाने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं हिचकती।

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