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शनिवार, 16 जुलाई 2016

सुदर्शन क्रिया:-श्री श्री रविशंकर जी द्वारा मानव जाति को दिया गया अनुपम उपहार -

सुदर्शन  क्रिया:-श्री श्री रविशंकर जी द्वारा मानव जाति को दिया गया अनुपम  उपहार -  
श्री श्री रवि शंकर जी 
सुदर्शन शब्द का चक्र  से  बहुत गहरा संबंध है। यहाँ पर सुदर्शन चक्र से अभिप्राय एक ऐसे गोलाकार instrument से है, जिसमें गति हो और जिसमें  समाज  को भयमुक्त बनाने की एवं ऊर्जा प्रदान करने क्षमता हो। सुदर्शन  का शाब्दिक  अर्थ  होता  है सुंदर  दिखने  बाला। सुंदर वही रह सकता है  जो कि  स्वस्थ  हो । दर्शन शब्द का चक्र  से बहुत गहरा संबंध है। यहाँ पर सुदर्शन चक्र से हमारे शरीर में भी 7 चक्र  हैं  जो गोलाकार  हैं  और  अपनी  जगह पर स्थिर रहते हुए गतिमान  है ।योगशास्त्र के  अनुसार  यह चक्र एक बार clockwise  घूम  कर ब्रह्मांड से  ऊर्जा  को खींचते  हैं और  दूसरी  बार anticlockwise  घूम कर वह खींची  गई  ऊर्जा  हमें  प्रदान  कर देते  हैं । यही क्रम लगातार चलता रहता है। इन  चक्रों  की सहायता  से  हमार चेतना  इतनी  ऊपर भी  उठ सकती  है कि हम अपने आत्मा का साक्षातकार  कर सकें।
हमारे द्वारा किए जाने बाले गलत आहार और गलत व्यवहार के कारण हममें इतनी Negativities भर जाती है कि धीरे धीरे इन चक्रों की गति बन्द हो जाती है और हमारा आध्यात्मिक  विकास रुक जाता है ।सुदर्शन क्रिया  ही वह साधना है जिससे  कि  हमारे  सातों चक्र स्वस्थ और गतिमान  बने रहते  है इतनी  सरल सहज और बहुआयामी यौगिक साधना  और कोई भी  दिखाई  नहीं  देती  है।वैदिक एवं पौराणिक काल में  शिष्य  वर्षों  तक गुरु  से प्रार्थना  किया करते थे तब जाकर  कहीं गुरु द्वारा  उन पर शक्तिपात  किया  जाता था । हमारा परम सौभाग्य है कि  इस साधना में जब हमारी  चेतना क्रमशः ऊपर उठती हुई आज्ञाचक्र पर आती है तो गुरूजी  द्वारा बहुत ही सहजता से शक्तिपात कर दिया जाता  है।
हम कितनी  भी  कोशिश  कर  लें  लेकिन  श्री श्री  गुरू जी  द्वारा  की गई इस करुणामयी  कृपा  का अंश  मात्र भी  मूल्य  नहीं  चुका  सकते है ! हाँ व्यक्तियों को art of living द्वारा आयोजित किये जाने बाले Happiness Program करने को प्रेरित करने से हम उन्हें भी अध्यात्म के  मागॆ  पर बढने में अपना सहयोग  प्रदान  कर सकते है।जिस आनंद की अनुभूति हम साधना में करते हैं यदि वह अनुभूति हमारे द्वारा  प्रेरित किसी  नये व्यक्ति को course के दौरान होती है तो हमारे द्वारा दी गयी प्रेरणा ultimately हमारा हमारे ऊपर किया गया उपकार ही तो होगा ।
"जय गुरुदेव"

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