Breaking

Post Top Ad

Your Ad Spot

मंगलवार, 21 जून 2016

मुस्लिमों ने एक नहीं मानी ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ की सलाह, मस्जिद में किया खुलकर योग...!!!

मुस्लिमों ने एक नहीं मानी ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ की सलाह, मस्जिद में किया खुलकर योग...!!!

मस्जिद में न सिर्फ युवाओं ने योग किया, बल्कि इसमें बुजुर्ग भी शामिल हुए। योग करने में सबसे आगे मस्जिद के मौलाना डॉ. वली मोहम्मद रहे l 

हाथरस: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मुसलमानों को योगा डे से दूर रहने की सलाह दी थी, लेकिन कुछ मुस्लिमों ने बोर्ड की सलाह को नजरअंदाज करते हुए मोदी की बात मानी। अगर आपको यह शब्द कहने में परहेज है तो अल्लाह भी कह सकते हैं। सूरज की तरफ मुंह करने से ऊर्जा मिलती है। योग करने से हाथ-पैरों में जान आती है। खून का सर्कुलेशन बढ़ता है। आंखों की रोशनी तेज होती है। पेट की खराबियां दूर होती हैं और नर्वस सिस्टम सही रहता है। 

हाथरस जिले के गांव अल्हैपुर चुरसैन के मुलमानों ने मस्जिद के अंदर योग किया। उन्होंने दुनिया भर के मुसलमानों को यह संदेश दिया कि योग दिवस का किसी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। यह सिर्फ खुद को चुस्त और दुरुस्त रखने का यह तरीका है। उन्होंने कहा कि योग का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। इसे मजहब से जोड़ना गलत है। योग तो शरीर को मजबूत बनता है। ओम का उच्चारण और सूर्य नमस्कार का बहाना बनाकर योग को मजहबी रूप दिया जा रहा है। जरूरी नहीं है कि आप ओम ही कहें। 





कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

Post Top Ad

Your Ad Spot

अधिक जानें