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बुधवार, 15 जून 2016

उपायुक्त,परिवहन विभाग,/वित्तनियंत्रक,परिवहन विभाग/आरटीओ, इलाहाबाद,/मुख्य राजस्व अधिकारी, प्रतापगढ़ को सौंपा पत्र ....!!!

उपायुक्त,परिवहन विभाग,/वित्तनियंत्रक,परिवहन विभाग/आरटीओ, इलाहाबाद,/मुख्य राजस्व अधिकारी, प्रतापगढ़ को सौंपा पत्र ....!!!
आल मोटर्स ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री आशुतोष पाण्डेय ने शासन की  तरफ से प्रतापगढ़ ए आर टी ओ भवन के लिए उनके सुझाए गए जमीन को देखा. जिला मुख्यालय की अहमियत बनाए रखने के लिए शासन द्वारा बनाई गई कमेटी के चारों अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण कराया, साथ ही शहर से  भेजे जाने के  सम्बन्ध में 3 पेज  का पत्र भी सौंपा.
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय हेतु स्थाई भवन बनाने के लिए नगर पालिका क्षेत्र के रंजीतपुर चिलबिला में गाटा संख्या – 2256 मि. / रकबा – 0.534 हेक्टेयर है. फिर भी जिला मुख्यालय से चिलबिला – अमेठी रोड़ पर शुकुलपुर में जिस भूमि का आवंटन जिला प्रशासन द्वारा किया गया, वह नगर क्षेत्र से 13 किमी. दूर बीरान क्षेत्र में है. प्रार्थी मुख्यमंत्री, उ. प्र. व प्रमुख सचिव, परिवहन विभाग, एवं आयुक्त, परिवहन विभाग सहित पूर्व में तैनात जिलाधिसहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय हेतु स्थाई भवन बनाने के लिए नगर पालिका क्षेत्र के रंजीतपुर चिलबिला में गाटा संख्या – 2256 मि. / रकबा – 0.534 हेक्टेयर है. फिर भी जिला मुख्यालय से चिलबिला – अमेठी रोड़ पर शुकुलपुर में जिस भूमि का आवंटन जिला प्रशासकारियों को अपने संगठन की तरफ से कई प्रार्थना पत्र दिया, परन्तु सभी प्रार्थना पत्र ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया.
थक हारकर प्रार्थी अपने संगठन आल मोटर्स ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन की तरफ से माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद “खंडपीठ लखनऊ” में एक जनहित याचिका संख्या –7931/205 एम. बी. की कई पेशी सुनवाई हुई. जिसमें दिनांक- 8 जनवरी, 2016 को सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद “खंडपीठ लखनऊ” ने अंतिम आदेश पारित कर दिया. उक्त आदेश का निराकरण कराने के लिए प्रार्थी पुनः जिलाधिकारी, प्रतापगढ़ के समक्ष अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया, परन्तु प्रार्थी के प्रत्यावेदन पर आज तक जिलाधिकारी महोदय गंभीरतापूर्वक विचार कर उसका निस्तारण तक नहीं किया, जो न्यायोचित नहीं है. 
चूंकि जनहित से ऊपर न तो ब्यवस्थापिका है, न ही कार्यपालिका और न न्यायपालिका ही है. जनहित सर्वोपरि है. जनहित को दरकिनार करके ए.आर.टी.ओ कार्यालय के स्थाई भवन का निर्माण जिला प्रशासन क्यों कराना चाहता ? जबकि पूर्व में जनप्रतिनिधियों की उदाशीनता के ही चलते भुपियामऊ चौराहे से पहले पर्यटन भवन का निर्माण 25 वर्ष पहले कराया गया, जिसका उपभोग आज तक किसी भी कार्य में नहीं लिया जा सका. ठीक इसी तरह गायघाट रोड़ पर पूरे केशवराय में 5 वर्ष पहले निर्मित हुए पोस्टमार्टम हाउस का भी वही हाल है. करोड़ों रुपये बर्बाद होने के बाद भी उक्त इमारतों का जनहित में कोई उपभोग नहीं हो सका. वजह सिर्फ और सिर्फ असुरक्षा है.
शहर से 13 किमी राजस्व विभाग की उदाशीनता की वजह से नगर पालिका क्षेत्र में जमीन उपलब्ध होते हुए भी उसका आवंटन शहर से काफी दूर किया गया है. आज बदलते परिवेश में ड्राईव लाईसेंस और गाड़ी रजिस्ट्रेशन कराने के लिए सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय तक महिलाओं को भी जाना आवश्यक कर दिया गया है. ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया और ये आवंटन जिला मुख्यालय से 13 किमी. दूर बीरान क्षेत्र में आँख मूंदकर कर दिया गया है, जो न्याय संगत नहीं है.
जबकि सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय हेतु स्थाई भवन बनाने के लिए निर्वाचन विभाग से पहले प्रार्थी अपने संगठन की तरफ से मांग करता रहा. उसके प्रार्थना पत्र में राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने रिपोर्ट लगाई कि जमीन मौके पर खाली है और उसका स्वामित्व नगर पालिका के अधीन है. जबकि निर्वाचन विभाग को विना नगर पालिका की सहमति / स्वीकृति के ही जिलाधिकारी महोदय द्वारा आवंटित कर दिया गया था, प्रकरण जब सार्वजानिक हुआ तो सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय व ई वी एम गोदाम हेतु आवंटित जमीन को जिलाधिकारी महोदय ने रद्द कर उसे भी नगर पालिका क्षेत्र से बाहर कर दिया. ऐसे में तो धीरे – धीरे जिला मुख्यालय का मतलब ही समाप्त होता जा रहा है.
प्रार्थी ने एक बार भी ये नहीं कहा कि निर्वाचन विभाग को नगर पालिका क्षेत्र के रंजीतपुर चिलबिला की गाटा संख्या – 2385 व / रकवा – 2 बीघा, 6 बिस्वा को क्यों आवंटित की गई ? हाँ, प्रार्थी का आरोप सिर्फ इतना रहा कि एक जैसे प्रकरण में दोहरा मापदंड क्यों अपनाया गया ? इस तरह राजस्व विभाग एक तरह के जनहित से जुड़े मामले में दोहरा मापदण्ड अपना रहा है, जो न्यायहित में नहीं है. जिला प्रशासन की उदासीनता का हश्र ये रहा कि जिस गाटा संख्या को नगर पालिका को तहसील प्रशासन खाली कराकर दिया था, उस पर नगर पालिका के अध्यक्ष अपनी बाउंड्री वाल में बड़ा सा गेट लगाकर कब्ज़ा करने की नियत बना चुके हैं.
31 मार्च, 2016 को नगर पालिका क्षेत्र में किराये के मकान में संचालित ए.आर.टी.ओ कार्यालय में 22 लाख की लूट को मद्देनजर रखते हुए प्रत्यावेदन को संज्ञान में लेकर जनहित की भावनाओं का सम्मान करते हुए माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद “खंडपीठ लखनऊ” में योजित जनहित याचिका संख्या –7931/2015 एम. बी. आदेश दिनांक- 8 जनवरी, 2016 का निराकरण कराते हुए गाटा संख्या – 2256 मि. / रकबा - 0.534 हेक्टेयर सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय के लिए आवंटित करने करें. साथ ही शुकुलपुर गाँव में स्थाई भवन पर पुनः शुरू हुए कार्य को को तब तक के लिए रोक दिया जाय, जब तक उक्त जनहित याचिका संख्या –7931/2015 एम. बी. आदेश दिनांक- 8 जनवरी, 2016 का निराकरण न कर दिया जाए...!!!

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