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बुधवार, 25 मई 2016

कालाकांकर रियासत की राजकुमारी कांग्रेस की पूर्व सांसद रत्ना सिंह का राजनीतिक सफरनामा

पहचानिये अपने जनप्रतिनिधि को ......!!!
प्रतापगढ़ संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर तीन बार सांसद निर्वाचित होने वाली राजकुमारी रत्ना सिंह के राजनैतिक जीवन के साथ-साथ उनके प्रारंभिक जीवन से प्रतापगढ़ की जनता को उनकी हकीकत बताने के लिए उनके पिता राजा दिनेश सिंह से शुरुआत करनी होगी।कालाकांकर रियासत के राजा दिनेश सिंह की छठी पुत्री के रूप में राजकुमारी रत्ना सिंह का जन्म 29 अप्रैल,1959 को नई दिल्ली में हुआ था। राजकुमारी रत्ना सिंह का लालन पालन राजपरिवार की तरह हुआ और उनकी शिक्षा भी देश की राजधानी दिल्ली से शुरू हुई।रत्ना सिंह ने जेसू एंड मेरी कालेज नई दिल्ली से बी. कॉम. किया है।30 दिसंबर,1995 को राजा दिनेश सिंह की मृत्यु के बाद राजा दिनेश सिंह की 6 पुत्रियों में सबसे छोटी रत्ना सिंह ने उनकी विरासत संभाली और राजनीति में आयीं और वर्ष 1996 में लोकसभा के लिए चुनी गयीं। दूसरी बार वर्ष 1999 का लोकसभा चुनाव जीत कर सांसद बनी और वर्ष 2009 का लोकसभा चुनाव जीत कर तीसरी बार सांसद बनी।
उत्तर प्रदेश का 70 वां जिले के रूप में प्रतापगढ़ जाना जाता है,जिसे लोग बेल्हा भी कहते हैं। क्योंकि यहां बेल्हा देवी मंदिर है, जो कि सई नहीं के किनारे बना है।इस जिले को ऐतिहासिक दृष्टिकोण से काफी अहम माना जाता है। यहां के विधानसभा क्षेत्र पट्टी के रूरे गाँव से ही देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू ने पदयात्रा के माध्यम से अपना राजनैतिक जीवन शुरूआत किया था। प्रतापगढ़ के कहला गाँव में किसानों ने आंदोलन कर अंग्रेजों के दांत खट्टे कर प्रतापगढ़ को राजनैतिक परिदृश्य में बहुत ऊंचा स्थान दिलाया था।यहाँ किसानों के आंदोलन में किसानों ने अपनी जान की कुर्बानी दी थी,जिनकी याद में कहला में ही स्मारक बनाया गया है। रानीगंज के बाबूपट्टी को राष्ट्रीय कवि हरिवंश राय बच्चन की जन्म-स्थली के नाम से भी जाना जाता है। प्रतापगढ़ की राजनीति में यहाँ के तीन मुख्य राजघरानों का नाम हमेशा से आगे रहा है। उसमें एक राजघराना राजा दिनेश सिंह का है,जो पूर्व में भारत के वाणिज्य मंत्री और विदेश मंत्री जैसे पदों पर सुशोभित रहे। इनकी रियासत कालाकांकर क्षेत्र है। मुख्य रूप से ठाकुर और ब्राह्मण जाति के बीच बंटा प्रतापगढ़ आज अशिक्षा, बिजली, सड़क, सफाई और विकास की मार सह रहा है। लगातार कांग्रेस का वर्चस्व होने के बावजूद यह जिला पिछले 68 सालों से अपनी दशा सुधरने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। प्रतापगढ़ में ट्रैक्टर फैक्ट्री खुली फिर भी इस शहर के लोग रोजगार के लिए तरसते रहे। अमृत फल आँवला को प्रतापगढ़ के लोगों ने अपने रोजगार का इसे जरिया बनाया। परन्तु जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से आँवला भी प्रतापगढ़ के लोंगों की भाग्य बदलने में सार्थक न हुआ। एक अदद आंवला फैक्ट्री भी प्रतापगढ़ में स्थापित नहीं हो सकी। लघु उद्योग के रूप में कुछ लोग ही आँवले को अपना रोजगार बना सके।
राजकुमारी रत्ना सिंह साथ में डिम्पल यादव 


फैक्ट्री विहीन जनपद प्रतापगढ़ अब तक सिर्फ राजनीति का ही शिकार हुआ है। कांग्रेस पार्टी ने रत्ना सिंह पर वर्ष 2014 में भी विश्वास जताते हुए उन्हें प्रतापगढ़ का टिकट दिया। रत्ना सिंह पूर्व में प्रतापगढ़ से तीन बार चुनाव जीत चुकी हैं। केंद्र सरकार में जिले के इकलौते मंत्री रहे राजा दिनेश सिंह की बेटी पूर्व सांसद रत्ना सिंह ने पहली बार वर्ष 1996 में चुनाव लड़ा था,जिसमें उन्होंने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी। उसके बाद वर्ष 1998 में भगवा लहर में भाजपा के रामविलास वेदांती ने उनको हराया था। साल भर बाद हुए लोकसभा चुनाव में रत्ना सिंह ने फिर से जीत हासिल की। वर्ष 2004 लोकसभा के चुनाव में कुंडा के बाहुबली बिधायक रघुराज प्रताप सिंह "राजा भैया" के मौसेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी को समाजवादी पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया। उन दिनों राजा भैय्या जेल में रहकर अपने मौसेरे भाई गोपाल जी के हाथों को मजबूत करते हुए कांग्रेस के पंजे को शिकस्त दिया था। वर्ष 2009 में जीत कर रत्ना सिंह फिर से सांसद बनीं।


वर्ष 1996 से लेकर अब तक तीन बार प्रतापगढ़ संसदीय क्षेत्र की आवाज लोकसभा में उठाने वाली सांसद रत्ना सिंह को भारत सरकार ने महिला सशक्तीकरण समिति का अध्यक्ष बनाया। पिछले वर्ष गैर सरकारी संगठन, प्राइम पॉइंट फाउंडेशन द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली महिला सांसद एवं सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले 35 वर्ष से कम आयु वाले 10 सांसद को सांसद रत्न सम्मान दिया गया,जिसमें कांग्रेस सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह का भी नाम शामिल रहा। दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के मामलें में आये राजनीतिक भूचाल में उत्तर प्रदेश के भूतत्व एवं खनिज कार्य राज्यमंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने उस वक्त नया विवाद खड़ा कर दिया था। मंत्री जी ने कहा था कि बसपा और कांग्रेस के कुछ बड़े नेता अवैध खनन में लिप्त हैं। अमेठी में प्रजापति ने 11 ऐसे नेताओं की लिस्ट जारी की थी। इसमें कांग्रेस और बसपा के सांसद सहित विधायक,पूर्व विधायक तथा एमएलसी के नाम शामिल थे। प्रजापति ने जो लिस्ट जारी की, उसमें कांग्रेस सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह का भी नाम शामिल रहा।
ताजुब होता है, देश के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के उस बयान पर,जब महँगाई के मुद्दे पर, वो विफल हुए तो मीडिया में बयान जारी कर देश वाशियों को सान्तवना दिए थे कि देश की जनता उनकी बात को समझे और उन पर विश्वास करे कि पैसा पेड़ों पे नहीं उगता। काश...! प्रधानमंत्री जी की बात सही होती।अब देश की जनता किसे सही माने..? प्रधानमंत्री के बयान को अथवा रत्ना सिंह द्वारा दाखिल किए गए जिला निर्वाचन अधिकारी समक्ष हलफनामें को। रत्ना सिंह स्वयं घोषणा की हैं कि महज पांच वर्ष में उनकी संपत्ति 1 करोड़ से बढ़कर 68 करोड़ हो गई। मुझे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का मंहगाई के मुद्दे वाला बयान आज भी याद है, जिसमें उन्होंने कहा था कि महंगाई को रोकने के लिए उनके पास कोई जादू की छड़ी नहीं है कि जिसे घुमाते ही सब कुछ सही हो जाए। परन्तु कांग्रेस के सांसदों के पास वो जादू की छड़ी कहाँ से आई जो 5 वर्ष में 1 करोड़ को 68 करोड़ में तब्दील कर दिया।
मजें की बात ये है कि रत्ना सिंह के वर्ष 2004, वर्ष 2009 और वर्ष 2014 के शपथपत्र और नामांकन में किये गए घोषणा में बहुत अंतर है जब वो सांसद रहती हैं तो उनकी संपत्ति बहुत कम हो जाती है और जब सांसद पद से हट जाती हैं तो उनकी संपत्ति में इतना इजाफा देखने को मिला कि आँखे खुली की खुली रह गई। वर्ष 2004 में रत्ना सिंह की संपत्ति महज 89 लाख, 4 हजार, 7 सौ 75 रुपए और देनदारी शून्य रहती है।
वर्ष 2009 में ये बढ़कर 67 करोड़,82 लाख,70 हजार, 7सौ, 25रुपए और देनदारी 10 लाख, 2 हजार रही। वर्ष 2014 में सबसे आश्चर्यजंक मामला रहा। यानि रत्ना सिंह की संपत्ति घटकर 68 करोड़ से 18 करोड़, 21 लाख, 86 हजार 7 सौ,13 रूपए हो गई, जबकि देनदारी 10 लाख की ही रही। यानि राजकुमारी रत्ना सिंह जब सांसद रहती हैं तो वो घाटे में चली जाती हैं और जब सांसद पद से हट जाती हैं तो मालामाल हो जाती हैं। ये बात आम आदमी के समझ से परे हैं।
हंगामा बरपा कर सांसद विकास निधि की रकम दो करोड़ से पांच करोड़ करवाने वाले माननीय इसे खर्च करने के प्रति कितने उदासीन हैं...? अकेले उत्तर प्रदेश के सांसद 431 करोड़ रुपये को खर्च करने के बदले उस पर कुंडली मारे बैठे हैं। संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए मिलने वाली सांसद निधि का राजकुमारी रत्ना सिंह द्वारा 31 मार्च, 2014 तक महज 77 % का ही उपयोग किया जाना क्षेत्र के प्रति उनकी उदासीनता को जाहिर करता है।प्रतापगढ़ की जनता तो इन पर तीन बार भरोसा किया और इन्हें अपना भाग्य विधाता मान अपने सर पर विठाया।परन्तु इन पर कांग्रेस ही भरोसा नहीं किया। संप्रग-2 वर्ष 2009 में डॉ. मनमोहन सरकार के गठन के बाद से प्रत्येक मंत्रिमंडल विस्तार में यह बात बड़ी जोर - शोर से इनके पिछलग्गुओं द्वारा उठायी जाती रही कि रत्ना सिंह को मंत्रिमंडल में लिया जा रहा है। एक बार तो इनके चाटुकारों ने इन्हें अपने ही आप जल संसाधन मंत्री तक बनाकर स्वयं ही मिठाई बांटकर एक - दूसरों का मुँह मीठा तक कराए।अब भला प्रतापगढ़ की जनता का इसमें क्या कुसूर…???
अब यहाँ की जनता राजा-रानी को चुनकर थक सी गई है। इनका पेट पता नहीं कितना बड़ा हो गया है कि वो भरता ही नहीं। कहने को तो हैं राजकुमारी,परन्तु इनका काम सब कमीशन खोरी वाला ही रहा। सांसद निधि को खुलेआम सांसद प्रतिनिधि रमेश प्रताप सिंह ने पूरे पांच साल बेंचा है,जिसने कमीशन नहीं दिया,तो उसकी खैर नहीं। फैक्सपेड के अवर अभियंता को तो संसदीय कार्यालय में राजकुमारी रत्ना सिंह के प्रतिनिधि रमेश प्रताप सिंह ने बंधक बनाकर मारा-पीटा था, जिसका कोतवाली नगर में बाकायदा मुकदमा भी दर्ज कराया गया। अवर अभियंता ने आरोप लगाया था कि सांसद निधि में कमीशन न देने की वजह से ही उसके साथ मारपीट की गई और उसे संसदीय कार्यालय में ही बंधक बनाया गया। है न हैरान करने वाली बात। राजकुमारी रत्ना ने अपनी सांसद निधि वहीं दिया, जहां उन्हें कमीशन की धनराशि नकद के रूप में पहले उनके संसदीय कार्यालय पहुंचाया। पांच विधानसभा मिलाकर प्रतापगढ़ संसदीय क्षेत्र का निर्माण किया गया। वर्ष 2009 के पूर्व कुंडा, बिहार, प्रतापगढ़, गड़वारा और रामपुरख़ास ही प्रतापगढ़ का संसदीय क्षेत्र हुआ करता था, जो परसीमन के बाद कुंडा और बिहार विधानसभा कौशाम्बी संसदीय क्षेत्र में शामिल हो गया और पट्टी और बीरापुर वर्तमान रानीगंज विधानसभा प्रतापगढ़ संसदीय क्षेत्र में शामिल हुआ।
राजकुमारी रत्ना सिंह पर तीनों बार सांसद निर्वाचित होने के बाद सम्पूर्ण कार्यकाल पर रामपुरख़ास विधान सभा को छोड़कर ये आरोप भी लगे कि कांग्रेस के आदर्श नेता प्रमोद कुमार, सांसद रत्ना सिंह के सांसद होने का भरपूर लाभ अपने विधानसभा क्षेत्र में लिया। यानि 4 विधान सभाओं की जनता पूरे कार्यकाल हाथ मलती रही। वर्ष 2014 में राजकुमारी रत्ना सिंह को प्रतापगढ़ की जनता ने चुनाव में जमानत जब्त करा दिया और पहले स्थान से चौथे स्थान पर दे मारा।राजकुमारी रत्ना सिंह को अपने विकास से फुर्सत नहीं, तो प्रतापगढ़ के विकास की बात कहाँ से सोचे…? इनके पिता राजा दिनेश सिंह ने जिस पेड़ को लगाया,उसी को काटने का कार्य भी किया। ए. टी. एल. की स्थापना कर बाद में मुलायम सिंह यादव से मिलकर महिंद्रा & महिंद्रा कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए ए. टी. एल. को बेचने का कार्य भी राजा दिनेश सिंह ही किया। राजा दिनेश सिंह का कांग्रेस में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मधुर सम्बन्ध थे। वो दिल से चाहे होते तो आज प्रतापगढ़ भी अपने वजूद में होता। अपने वजूद के लिए आज उसे तरसना न पड़ता। जब कभी इंदिरा गांधी प्रतापगढ़ आती थी तो वो सीधे कालाकांकर किला पहुँचती थी।फिर भी प्रतापगढ़ अपने विकास के लिए आज अपाहिजों की तरह अपने को महसूस करने पर विवश है...!!!

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