नई दिल्ली। बोफोर्स घोटाले से भी बड़ा घोटाला माने जा रहे आगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले की आवाज अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। इस संबंध में सुप्रीम में जनहित याचिका दायर करके घोटाले की जांच एसआइटी से कराने की मांग की गई है। आगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एसपी त्यागी पर कंपनी फिनमैकेनिका से रिश्वत लेने के मामले पर भले ही सरकार ने तुंरत सीबीआई जांच के आदेश दे दिए हैं लेकिन विपक्षी पार्टी सरकार के इस रवैये से खुश नहीं है। भाजपा ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी पर सवाल खड़ा किया है कि आखिर सरकार को इस मामले पर कार्रवाई करने में एक साल से अधिक वक्त क्यों लगा। 
भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने सवाल उठाया कि हेलीकॉप्टर कंपनी इटली की थी क्या इसीलिए अब तक मामले की भारत में जांच शुरू नहीं हुई? क्या इटली सरकार की ओर से जानकारी आने में देर लगी है या सरकार ने इसे नजरअंदाज किया है। प्रसाद ने कहा कि रक्षा मंत्रालय को भी इस मामले में कुछ कमीशन जरूर मिली होगी। भाजपा ने इसे दूसरे बोफोर्स मामले से जोड़ा है। भाजपा ने जल्द इसपर सीबाआई जांच की मांग की है और इसकी रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को सौंपने पर जोर दिया है। इस बीच, जांच के दौरान सीबीआई ने रक्षा मंत्रालय से मामले से संबंधित सभी दस्तावेज मांगे हैं। गौरतलब है कि बुधवार को हेलीकॉप्टर घोटाला सामने आने के बाद रक्षा मंत्री एके एंटनी ने इस मामले से जुड़े सभी दोषियों को कड़ी सजा देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जो भी इस घोटाले से जुड़े हैं उन्हें बख्सा नहीं जाएगा। उनपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने कहा कि सरकार सीबीआई रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। 
उन्होंने कहा कि अगर आरोप साबित हो जाते हैं तो यह डील रद्द हो जाएगी और कंपनी को भी बंद कर दिया जा सकता है। हालांकि वायुसेनाध्यक्ष ने इस मामले को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कह दिया है कि उनका इस घोटाले से कोई लेना देना नहीं है। वह 2007 में ही पद से सेवा निवृत हो चुके थे, जबकि यह मामला 2010 का है। वे तो खुद चाहते हैं कि इस मामले की जल्द जांच हो। इस घोटाले के बाद रक्षा सौदों की घोटालों की सूची में एक और नाम जुड़ गया है। इटली की एक जांच एजेंसी ने ंवायुसेना के चीफ पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में कंपनी फिनमैकेनिका से घूस ली थी। बताया जाता है कि कंपनी ने इस डील के तहत टेंडरों के नियमों में फेरबदल करने के लिए त्यागी को रिश्वत दी थी। हालांकि चीफ ने टेंडर में किसी तरह के फेरबदल से साफ इन्कार किया है। गौरतलब है कि इस मामले में मंगलवार को कंपनी के सीईओ को रोम से गिरफ्तार कर लिया गया है। 
आरोप यह भी लगे हैं कि इस डील से सेनाध्यक्ष के साथ उनके परिवार को भी फायदा पहुंचा है। इस मामले में उनके परिवार के तीन सदस्यों का भी नाम शामिल हैं। करीब 3,600 करोड़ रुपये के सौदे को हथियाने के लिए भारत में साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की रिश्वत बांटी गई थी। संसद सत्र से पहले उजागर हुए इस मामले ने सरकार की परेशानी खासी बढ़ा दी है। मामले के खुलासे के बाद विपक्षी भाजपा के आक्रामक तेवरों से घबराई सरकार ने तुरंत मामले की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही सरकार ने फिलहाल इन हेलीकॉप्टरों की अगली खेप भी न लेने का मन बना लिया है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, 64 पेज की अपनी रिपोर्ट में जांचकर्ताओं ने त्यागी के नाम का खुलासा किया है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सितांशु कार के मुताबिक इस सौदे की जांच में प्राप्त जानकारियों को लेकर बार-बार आग्रह के बावजूद इटली और ब्रिटेन सरकार की ओर से नई दिल्ली को कोई जानकारी नहीं दी गई है। लिहाजा मंत्रालय ने इसकी जांच सीबीआई को देने का फैसला किया है। 
भारत ने 2010 में फिनमैकेनिका की सहयोगी आगस्ता-वेस्टलैंड [यूके] के साथ 12 हेलीकॉप्टरों की खरीद का सौदा किया था। कंपनी के सीईओ की गिरफ्तारी के बाद अब आगस्ता-वेस्टलैंड के प्रमुख ब्रूनो स्पैग्नोलिनी को नजरबंद करने के भी आदेश दिए गए हैं। इस कड़ी में अक्टूबर 2012 में स्विट्जरलैंड पुलिस ने गुइडो राल्फ हाशके नामक 62 वर्षीय कंसल्टेंट को भी गिरफ्तार किया था। हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया था। करीब डेढ़ साल से इटली सरकार फिनमैकेनिका के खातों को भारत के साथ हुए इस सौदे में दलाली की पड़ताल के लिए खंगाल रही है। मामले पर भारत अप्रैल और अक्टूबर में इटली से जानकारी देने का आग्रह कर चुका है। साथ ही सौदे को लेकर ब्रिटेन से भी मदद मांगी गई थी। प्रवक्ता के अनुसार इटली सरकार का कहना है कि जांच अभी न्यायिक निगरानी में है। इस कारण इटली सरकार फिनमैकेनिका कंपनी से जुड़ी जांच पर जानकारियां साझा नहीं कर सकती। 
सूत्रों के मुताबिक इस सौदे पर सीबीआइ जांच शुरू होने के बाद जब तक तस्वीर स्पष्ट नहीं होती भारत के लिए मार्च, जून और सितंबर 2013 में कुल नौ एडब्ल्यू-101 वीवीआइपी हेलीकॉप्टरों की पावती टालने के सिवा चारा नहीं है। जनवरी 2013 में रक्षा मंत्रालय तीन हेलीकॉप्टर इतालवी कंपनी से हासिल कर चुका है जो पालम वायुसेना स्टेशन पर खड़े हैं। हालांकि अभी तक किसी अति विशिष्ट व्यक्ति ने इनका इस्तेमाल नहीं किया है। इस सौदे में गड़बड़ी साबित हुई तो इसके छींटे प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार एसपीजी और वित्त मंत्रालय पर भी आएंगे। अभी तक इस सौदे के लिए भारत में रिश्वत पाने को लेकर किसी का नाम सामने नहीं आया है। वैसे रक्षा मंत्रालय इंटेग्रिटी पैक्ट का हवाला देते हुए कह चुका है कि अगर गड़बड़ी पाई गई तो सौदा रद हो सकता है