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शनिवार, 7 मई 2016

इसको कहते हैं ,"विनाशकाले विपरीत बुद्धि" या "सिर मुंडाते ही ओले पड़ना"

इसको कहते हैं ,"विनाशकाले विपरीत बुद्धि" या "सिर मुंडाते ही ओले पड़ना"
संसद में रक्षामंत्री मनोहर  पर्रिकर 

कल राज्यसभा में अगस्टा हेलीकॉप्टर घूसखोरी लूटकांड पर बहस के अंत में रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने शालीनता के साथ इस लूटकांड की तिथिवार जानकारी जब अंग्रेजी में पढ़ना शुरू किया तो कांग्रेसी गैंग को लगा कि,इसी बात को मुद्दा बनाकर पर्रिकर पर चढ़ लो।परिणामस्वरूप आनंद शर्मवा सदन के अंदर नंगनाच पर उतारू हो गया था लेकिन पर्रिकर जी ने जैसे तैसे अपनी बात कह ही दी थी।
किन्तु आज लोकसभा में पर्रिकर जी कल से सबक सीख कर आये थे।आज इन्होंने लोकसभा में तथ्यों को कम पढ़ा और अपने अंदाज़ में बोले ज्यादा, वो भी हिंदी में उनको सुनकर ऐसा लग रहा था कि उनके मुंह से शब्द नहीं निकल रहे बल्कि बहुत मोटे और घटिया किस्म के चमड़े से बने, चर्रर्र चर्रर्र बोलने वाले जूतों की ताबड़तोड़ बरसात हेलीकॉप्टर घूस लूट करने वाले गिरोह पर हो रही थी।शर्मा अपने कल के नंगनाच पर आज बहुत पछता रहा होगा । नाहक में भूखे शेर को भड़का दिया ।

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