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रविवार, 29 मई 2016

बीते हुए हुए लम्हों की कसक याद तो होगी..!!!

बीते हुए हुए लम्हों की कसक याद तो होगी..!!!





कुछ घटनाएं जीवन में ऐसे ही घटित होती है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता...! बात वर्ष 1990 की है, जिसे पढ़कर मानवीय संवेदनाएं एक बार जीवित हो जाती हैं...! उन दिनों वेरोजगारी और मंहगाई का ये आलम नहीं था...! असम से दो सहेलियाँ रेलवे में भर्ती हेतु गुजरात रवाना हुई...! रास्ते में एक स्टेशन पर गाड़ी बदलकर आगे का सफ़र उन्हें तय करना था,पहली गाड़ी में कुछ लड़को ने उनसे छेड़-छाड़ की थी, जिसकी वजह से अगली गाड़ी में तो कम से कम सफ़र सुखद हो...! यह आशा मन में रखकर भगवान से प्रार्थना करते हुए दोनों सहेलियाँ स्टेशन पर उतर गई और भागते हुए रिजर्वेशन चार्ट तक वे पहुंची और चार्ट देखने लगी...! चार्ट देख दोनों परेशान और भयभीत हो गयी, क्योंकि उनका रिजर्वेशन कन्फर्म नहीं हो पाया था....! न चाहते हुए उन दोनों युवतियों ने नज़दीक खड़े TC से गाड़ी में जगह देने के लिए विनती की...! TC ने भी गाड़ी आने पर कोशिश करने का आश्वासन दिया....! एक दूसरे को शांत्वना देते दोनों गाड़ी का इंतज़ार करने लगी...! 
आख़िरकार गाड़ी आई और दोनों जैसे-तैसे कर गाड़ी में एक जगह बैठ गई...!!! अब सामने देखा तो क्या....? सामने दो नौजवान युवक बैठे थे...! पिछले सफ़र में हुई बदसलूकी वो कैसे भूल जाती....? लेकिन अब वहां बैठने के अलावा उनके पास कोई चारा भी नहीं था, क्योंकि उस डिब्बे में कोई और जगह ख़ाली भी नहीं थी....! गाड़ी निकल चुकी थी और दोनों की निगाहें TC को ढूंढ रही थी, शायद कोई दूसरी जगह मिल जाये.....! कुछ समय बाद गर्दी को काटते हुए TC वहा पहुँचा और कहने लगा कहीं जगह नहीं है और इस सीट का भी रिजर्वेशन अगले स्टेशन से है...! कृपया आप अगले स्टेशन पर दूसरी जगह देख लीजिये....! यह सुनते ही दोनों के पैरो तले जैसे जमीन ही खिसक गयी, क्योंकि रात का सफ़र जो था....! गाड़ी तेज़ी से आगे बढ़ रही थी...! जैसे-जैसे अगला स्टेशन पास आने लगा, दोनों परेशान होने लगी...! लेकिन सामने बैठे दोनों नौजवान उनकी परेशानी के साथ भय की अवस्था बड़े बारीकी से देख रहे थे....!
जैसे ही अगला स्टेशन आया, दोनो नौजवान उठ खड़े हुए और थोड़ी देर के लिए कहीं चले गए....! अब दोनों लड़कियां उनकी जगह बैठ चुकी थी और गाड़ी आगे निकल पड़ी थी...! कुछ क्षणों बाद वो नौजवान वापस आये और कुछ कहे बिना नीचे चद्दर विछाकर सो गए....! दोनों सहेलियाँ यह देख अचम्भित हो गयी....! साथ ही डर भी रही थी, जिस प्रकार उनके साथ सुबह के सफ़र में हुआ था, फिर भी दोनों युवतियां उसे याद कर खुद को समेटते और सहमते हुए सो गयी....! सुबह चाय वाले की आवाज़ सुन नींद खुली तो दोनों ने उन नौजवानों को धन्यवाद कहा...., तो उनमे से एक नौजवान ने कहा " बहन जी, गुजरात में कुछ मदद लगे तो जरुर बताना....!" अब दोनों सहेलियों का उनके बारे में मत बदल चुका था, खुद को बिना रोके एक लड़की ने अपनी बुक निकाली और उनसे अपना नाम और संपर्क लिखने को कहा....! दोनों ने अपना नाम और पता बुक में लिखा और "हमारा स्टेशन आ गया है" ऐसा कह उतर गए और गर्दी (भीड़)में कही गुम हो गए ! दोनों सहेलियों ने उस बुक में लिखे नाम पढ़े...! वो नाम थे, नरेंद्र मोदी और शंकर सिंह वाघेला...! 
यह कोई जोक्स नहीं है...! उनमें से एक युवती फ़िलहाल General Manager of the centre for railwayinformation system Indian railway New Delhi के पद पर कार्यरत है और यह लेख "The Hindu "इस अंग्रेजी पेपर में पेज नं 1 पर "A train journey and two names to remember " दिनांक 1 जुन 2014 को प्रकाशित हुआ है... ! तो क्या आप, अब भी ये सोचते है कि हमने गलत प्रधानमंत्री चुना है.....???http://m.thehindu.com/…/a-train-journey-…/article6070562.ece


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