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सोमवार, 9 मई 2016

......तो ऐसे उत्तराखंड विधानसभा में फ्लोर टेस्ट जीत जाएंगे हरीश रावत....!!!

......तो ऐसे उत्तराखंड विधानसभा में फ्लोर टेस्ट जीत जाएंगे हरीश रावत....!!!

सुप्रीम कोर्ट 


देश में न्यायिक ब्यवस्था पर कोई प्रश्न चिन्ह न लगा सके इसके लिए आतंकी याकूब मेमन को मुम्बई के आतंकी हमले में दोषी सिद्ध होने के बाद देश के तथाकथित सेक्लुरिजम के ठेकेदारों ने महामहिम राष्ट्रपति के यहाँ से माननीय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और रजिस्ट्रार के आवास पर ऐसी घुड़दौड़ लगाई कि उस घुड़दौड़ से माननीय सुप्रीम कोर्ट के ताले रात्रि में ही खोलने पड़े। न्यायिक ब्यवस्था में आस्था बरकरार रखने और विश्व में सन्देश देने के लिहाज से  देश का सुप्रीमकोर्ट रात 12 बजे से सवेरे 4 बजे तक खुला रहा। 

ये अकेले अल्पसंख्यकों के मामलों का हाल नहीं। मृतकों की सहायता राशि के चंदे को शराब, कबाब व ऐय्याशी में उड़ाने वाली तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ़्तारी पर रोक के लिए सुप्रीमकोर्ट तीस्ता के वकील की सुनवाई फोन से ही कर लेता है। गरीबों को नशे में अपनी गाड़ी से रौंदने के लिए सलमान खान को जेल भेजने के निचले कोर्ट के आदेश पर रोक की सुनवायी के लिए मुंबई हाईकोर्ट कुछ मिनटों में ही तैयार हो गया था।परन्तु 3-3 स्टिंग ऑपरेशनों में खुलेआम विधायकों की खरीद के लिए बुरी तरह बेनकाब हो रहे हरीश रावत के विरोधी विधायकों के मामले के लिए माननीय सुप्रीमकोर्ट को समय नहीं मिला और मामला 12 मई तक के लिए आगे बढ़ा दिया। 
उत्तराखंड में राजनैतिक संकट गहराने के बाद हाईकोर्ट नैनीताल की एकल पीठ ने फैसला दिया कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन गलत लगाया। दूसरे दिन ही हाईकोर्ट नैनीताल की डबल बेंच ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दिया। बाद में डबल बेंच का आदेश जो आया उस पर केंद्र सरकार ने पूरा प्रकरण माननीय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ले गई,जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे किया कर दिया। साथ ही बहुमत सिद्ध करने का आदेश दे दिया। अब समस्या खड़ी हुई कि बागियों के मताधिकार पर । आज उस पर सुबह हाईकोर्ट नैनीताल ने आदेश जारी किया कि बागियों को मताधिकार से वंचित रखा जाएगा। देश की जनता की निगाह माननीय सुप्रीम कोर्ट के ऊपर टिकी थी।   
माननीय सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्णय न लेने से न्यायिक ब्यवस्था में आस्था रखने वालों को आघात जरूर लगा। कानून पर आस्था व विश्वास रखने वालों को तर्क है कि उत्तराखंड में शक्ति परिक्षण के लिए भी याकूब मेनन,तीस्ता सीतलवाड़ और सलमान खान के प्रकरण की तरह उत्तराखंड में शक्ति परीक्षण पर निर्णय होना चाहिए था । जबकि इन विधायकों की सदस्य्ता का फैसला हरीश रावत सरकार के कल (10 मई) को होनेवाले शक्ति परीक्षण के लिए निर्णायक है। ऐसे में उक्त प्रकरण की सुनवाई 12 मई तक बढ़ाकर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने हरीश रावत सरकार को अनौपचारिक जीवनदान/अभयदान तो दे ही दिया है ।
उत्तराखंड विधानसभा में फ्लोर टेस्ट प्रकरण की सुनवाई माननीय सुप्रीम कोर्ट में बढ़ाकर 12 मई तक कर देने से मामला और उलझता दिख रहा है ।दूसरी तरफ उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कांग्रेस के 9 बागी विधायकों की उस अर्जी को खारिज दिया, जिसमें उन्होंने अपनी सदस्यता बहाल करने की अपील की थी। इस अर्जी के खारिज होने के साथ ही कांग्रेस के ये 9 बागी विधायक कल बहुमत परीक्षण में वोट नहीं दे पाएंगे। इन बागी विधायकों ने अब सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है। हाईकोर्ट के आज के फैसले से हरीश रावत को बड़ी राहत मिली है। जानकारों का कहना है कि हरीश रावत को अपनी सरकार बचाने का बड़ा मौका मिल गया है।



उत्तराखंड में अब आगे क्या होगा.....?
हरीश रावत को 10 मई को विधानसभा के पटल पर बहुमत साबित करना हैउत्तराखंड में कुल विधानसभा सीटें 71 हैं। 9 बागी विधायकों की सदस्यता रद्दा होने के बाद विधानसभा में सीटों का आंकड़ा अब 62 हो गया है। इसके साथ बहुमत का आंकड़ा घट कर 32 हो गया है। पार्टी के अनुसार सीटों की बात करें तो अब कांग्रेस के पास 27 विधायक बीजेपी के पास 28, बीएसपी के पास 02, यूकेडी के पास एक और अन्य के खाते में 03 सीटें हैं।इसके साथ ही एक मनोनीत सदस्य भी है। स्पीकर वोटिंग में शामिल नहीं होंगे इसलिए कांग्रेस के वोट घटकर हो 26 जाएंगे । इन सब को अगर जोड़ दें तो वोटिंग में कांग्रेस के पास कुल 33 वोट है जबकि विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 32 ही है। बीजेपी के पास 28 (हालांकि बीजेपी का एक विधायक सस्पेंड है, जो वोट नहीं दे सकता है) सीटें हैं।

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