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सोमवार, 23 मई 2016

!!!...मंडलायुक्त के आगमन पर जिला कलेक्ट्रेट का सूरत-ए-हाल...!!!

!!!...मंडलायुक्त के आगमन पर जिला कलेक्ट्रेट का सूरत-ए-हाल...!!!
@@@.... बारिस हुई तो बेल्हा भी बन सकता है, तमिलनाडु और केदारनाथ धाम...!!!
बारिस हुई तो बेल्हा भी बन सकता है, 
तमिलनाडु और केदारनाथ धाम...!!!
जिलाधिकारी महोदय जी ने एक माह पूर्व जब धर्मशाला वार्ड में जल भराव हुआ था तब उन्होंने कहा था कि नगरपालिका तो स्वायत्तशासी संस्था है । उस पर बहुत ज्यादा अधिकार जिला प्रशासन का नहीं होता। आज जिला कलेक्ट्रेट पहली ही बरसात में डूब गया । डी एम साहेब, कलेक्ट्रेट में पानी भरते ही नगर पालिका का संसाधन कैसे आ गया ....??? सिर्फ 20 मिनट की बरसात में शहर के आधे से अधिक हिस्से के घरों में गंदे नाले वाला पानी घुस गया। सुबह नहाने धोने की जगह घर की सफाई लोंगों को पहले करनी पड़ी।मछली मारने की तरह लोग पानी को घर से बाहर उलचकर निकाले...!!!
क्या यही ब्यवस्था है, पावन प्रतापगढ़ की...??? डी एम साहेब, पावन प्रतापगढ़ को ऐसे सफल बनाएगें...??? शहरवासियों की दशा पर रोना आता है । अब आप कहोगे कि हर पांच वर्ष में शहरवासियों को सत्ता परिवर्तन का मौका मिलता है। क्यों नहीं सत्ता परिवर्तन कर शहर के जीवन स्तर में सुधार किये । बात तो सही है । इसमें नगर की जनता भी जिम्मेवार है। अब जनता कहती है कि नपा अध्यक्ष बाहरी मतदाताओं को शहर में फर्जी मतदाता बनाए हुए हैं और यही नौकरशाही उसमें भी आड़े आती है । शिकायतों के बावजूद भी फर्जी मतदाता नगरपालिका क्षेत्र में बने रह जाते हैं। जिसकी बदौलत 4 बार से श्री हरि प्रताप सिंह अध्यक्ष पद पर अपना कब्ज़ा जमाने में सफल रहे । 
18 वर्ष से एक ही ब्यक्ति के हाथ में नगर पालिका की शासन सत्ता होने के बावजूद शहरवासी हल्की सी बारिस में अपने घरों में गन्दे नाले के पानी को उलचते हैं । ऐसे में शर्म आती है उन पर, जो ब्यवस्था में बैठकर सिर्फ तमाशा देखते हैं और अपनी जिम्मेवारी से भागते हैं....!!! जिलाधिकारी महोदय, कल जब बारिस होगी और प्रतापगढ़ का हाल बेहाल होगा तो कैमरे के सामने ये मत कहियेगा कि हमें तो पता ही नहीं था । मौका अच्छा है अभी बारिस होने और मानसून आने में पूरे 1 माह बचे हैं । नगर पालिका द्वारा अभी तक नाले व नालियों की सफाई तक नहीं कराई जा सकी है । मेरे आरोप को आज की 20 मिनट की हल्की बारिस ने सिद्ध कर दिया है । आपका कलेक्ट्रेट परिसर इतनी बारिस से जलमग्न हो गया । 
आप इस पर विचार नहीं किये। इतनी दूरी में कलेक्ट्रेट परिसर स्थापित है और जल निकासी के लिए नाली तक नहीं बनाई जा सकी है । ये शर्मनाक नहीं तो और क्या है....??? डी एम साहेब, बात यहीं खत्म नहीं होती । 3 वर्ष पूर्व इलाहाबाद-फैज़ाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग नगर क्षेत्र की दक्षिणी सीमा जोगापुर सैयाबांध पर नगरपालिका अध्यक्ष श्री हरि प्रताप सिंह द्वारा रेलवे लाईन और राजमार्ग के बीच में सीताराम धाम के सामने मल्टी काम्प्लेक्स बिल्डिंग का निर्माण कर सैकड़ों वर्ष पूर्व का नाला बन्द कर दिया है, जिसके ध्वस्तीकरण का आदेश पहले नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र, प्रतापगढ़ के कार्यालय द्वारा पारित किया गया जिसकी अपील आपके पास दाखिल की गई । उक्त अपील में पिछले सप्ताह दोनों पक्षों को सुनने के बाद आप द्वारा अपील खारिज कर ध्वस्तीकरण का आदेश बरकरार रखा गया है ।
डी एम साहेब, समस्या ये है कि 1 माह बाद बारिस शुरू होगी । विगत 2 वर्षों से बारिस नहीं हुई, नहीं तो ये समस्या पहले भी आती। 3 वर्ष पहले आई थी । उस वक्त दो दर्जन से अधिक गाँव जलमग्न हो गए थे, तब तत्कालीन उप जिला मजिस्ट्रेट, सदर श्री संजय खत्री ने जे. सी. बी. से उक्त बिल्डिंग की दीवाल को ध्वस्त करवाया था। साथ ही मुकदमा भी दर्ज करवाया था, परन्तु उनके जाते ही नपा अध्यक्ष फिर से ध्वस्त हुई दीवाल को पुनः बनवा लिया । मजे की बात ये है कि इलाहाबाद-फैज़ाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग के नीचे नाले के पानी की निकासी हेतु पुल का निर्माण हुआ है और रेल लाइन के नीचे भी नाले के पानी के निकास हेतु पुल बनाया गया है । फिर बीच में उसे कोई, कैसे बंद कर मल्टी काम्प्लेक्स बिल्डिंग का निर्माण कर सकेगा....???
इस वर्ष केलिए मौसम विभाग के अनुसार बरसात अच्छी होगी । यदि इस वर्ष बारिस अच्छी हुई तो प्रतापगढ़ को केदारनाथ धाम और तमिलनाडु के हालात जैसे त्रासदी से जूझना पड़ सकता है । अभी भी वक्त है जिलाधिकारी महोदय, नहीं तो कल आपके पास इस त्रासदी के घटित होने के बाद कोई जवाब न होगा । लोग जब तवाह हो जायेंगें तो राजनीतिक लोग तावा और चिमटा लेकर प्रतापगढ़ पहुंचेगें और लाश पर राजनीतिक रोटी सेकेगें । रेस्क्यू टीम भी आयेगी । साथ में सेना भी आयेगी । हजारों करोड़ रूपए पानी की तरह बहाया जाएगा । लेकिन अभी कुछ नहीं किया जायेगा, क्योंकि अपने देश में घड़ियाली आंसू बहाने का जो रिवाज़ है ।आपदा प्रबंधन पर भी देश की नौकरशाही और नेतागण हाथ साफ़ करने में पीछे नहीं रहते । मेरे मन की ब्यथा थी, सो डकार के रूप में निकल गई । बाक़ी आपकी मर्जी....!!!
।। एक जागरूक नागरिक । 
           रमेश तिवारी 
"पत्रकार/आरटीआई कार्यकर्ता"

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