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शुक्रवार, 20 मई 2016

यकीन मानिए... आज के बाद सियासी शेख चिल्ली की रातें करवटें बदलते हुए ही कटेंगी...!!!

यकीन मानिए... आज के बाद सियासी शेख चिल्ली की रातें करवटें बदलते हुए ही कटेंगी...!!!


 दे दाता के नाम तुझको......!!!

लालू यादव की राजनीतिक व्हील चेयर पर बैठकर बिहार की सत्ता के गलियारों में घूम रहे सियासी शेख चिल्ली को आज दो जोर के झटके लगे.  बंगाल में अकेले दम पर प्रचण्ड बहुमत से लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटी ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपनी महत्वाकांक्षा को खुलकर व्यक्त करते हुए खुद को भाजपा विरोधी खेमे के प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रूप में प्रस्तुत कर दिया. 

बिहार के सियासी शेख चिल्ली से कई गुना ज्यादा जनाधार अकेले अपने दम पर रखने वाली ममता बनर्जी के आज के तेवरों ने भाजपा विरोधी खेमे का एकमात्र चेहरा बनने के सियासी शेख चिल्ली के हसीन सपनों के महल के बनने से पहले ही उसकी नींव में पानी भरने का काम प्रारम्भ कर दिया है. आने वाले दिनों में पानी की यह धार और ज्यादा मोटी व तीव्र ही होगी. फिलहाल तो सियासी शेखचिल्ली के हसीन सपने के लिए यही कहा जा सकता है कि, "गाँव बसा नहीं और लुटेरे पहले आ गए."  

आज आये 5 राज्यों के चुनाव परिणामों से सियासी शेख चिल्ली को दूसरा जोर का झटका केरल से मिला है. कुछ महीनों पहले ही केरल के कांग्रेसी मुख्य्मंत्री ओमान चांडी ने बहुत जोरशोर से शराब बंदी का ढोल पीटा था. और सैकड़ों दुकानें व बार आनन फानन में बंद करा दिए थे. अपने इस चुनावी हथकंडे के पक्ष में चांडी ने केरल के चर्चो. और मस्जिदों से बाकायदा फतवे भी जारी कराये थे. इन फतवों को देख सुनकर ही सियासी शेख चिल्ली की लार बहुत जोर से टपकने लगी थी. इसीलिए शराब बंदी का सियासी नशा उसके सिर पर बुरी तरह सवार हो गया था. 

लेकिन आज आये केरल विधानसभा के चुनाव परिणामों ने केरल में जिस तरह कांग्रेस का राजनीतिक जनाजा बहुत धूम से निकाला है. उससे यह स्पष्ट हो गया कि, शराबबंदी का चांडी का चुनावी हथकंडा और उसके जरिए चर्चों और मस्जिदों के फतवे बटोरने की चांडी की धुर साम्प्रदायिक सियासी कोशिश बुरी तरह असफल हुई. यकीन मानिए...,आज के बाद सियासी शेखचिल्ली की रातें करवटें बदलते हुए ही कटेंगी...!!!

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