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सोमवार, 2 मई 2016

हेलीकॉप्टर डील होगी रद्द, राहुल के करीबी पर भी उठे सवाल...!!!

हेलीकॉप्टर डील होगी रद्द, राहुल के करीबी पर भी उठे सवाल...!!!


नई दिल्ली। वीवीआइपी हेलीकॉप्टर सौदे में घोटाले के आरोपों के बाद घरेलू मोर्चे पर घिरी सरकार ने इसे रद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कड़ी में रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को अगस्ता-वेस्टलैंड कंपनी को कारण बताओ नोटिस देते हुए सात दिन में जवाब देने को कहा है। इसके साथ ही सरकार ने जांच के लिए सीबीआइ की टीम इटली भेजने का फैसला किया है।
रक्षा मंत्रालय प्रवक्ता सितांशु कार के मुताबिक मंत्रालय ने 12 एडब्ल्यू-101 हेलीकॉप्टर खरीद को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। मंत्रालय ने ब्रिटेन स्थित अगस्ता-वेस्टलैंड को कारण बताओ नोटिस देते हुए पूछा है कि क्यों न 2010 में उसके साथ हुए सौदे को रद कर दिया जाए। रक्षा मंत्रालय के अनुसार आगे की कार्रवाई सौदे की शर्तो और उसके साथ हुए इंटेग्रिटी पैक्ट के मुताबिक होगी। सरकार के इस कदम को संसद सत्र से पहले सियासी पेशबंदी के तौर पर देखा जा रहा है।
कंपनी को जवाब के लिए सात दिन की मियाद 22 फरवरी को खत्म होगी और संसद सत्र 21 फरवरी को राष्ट्रपति अभिभाषण के साथ शुरू होगा। सूत्रों के मुताबिक इस सौदे की जांच में रक्षा मंत्रालय को प्राथमिक तौर पर इटली से कुछ दस्तावेज मिले हैं। रक्षा मंत्रालय ने सौदे में घोटाले और घूसखोरी के आरोपों और इटली में फिनमैकेनिका कंपनी के खिलाफ चल रही जांच पर विदेश मंत्रालय से शुक्रवार को रिपोर्ट मिलने के बाद नोटिस देने का फैसला किया। उल्लेखनीय है कि गुरुवार को रक्षा मंत्रालय ने फिनमैकेनिका कंपनी को पत्र लिखकर घूसखोरी के आरोपों पर सफाई मांगी थी।
इस बीच रक्षा मंत्रालय ने करीब 3546 करोड़ रुपये के इस सौदे पर पहले ही ब्रेक लगा दिया था। कंपनी से जनवरी 2013 में हासिल तीन हेलीकॉप्टरों की पहली खेप के बाद शेष नौ को फिलहाल न लेने का फैसला किया गया है। साथ ही कंपनी को भुगतान भी रोक दिया गया है। महत्वपूर्ण है कि कंपनी को 30 फीसद धनराशि का भुगतान किया जा चुका है।
खरीद में ईमानदारी बरतने के लिए हुए इंटेग्रिटी पैक्ट की शर्तो के मुताबिक भारत सूद समेत भुगतान की राशि मांग सकता है। साथ ही हर्जाना भी वसूल सकता है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक कंपनी का जवाब देखने के बाद सरकार अगला कदम उठाएगी। उल्लेखनीय है कि इस सौदे को लेकर पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी और उनके निकट संबंधियों पर घूसखोरी के आरोप लगे हैं।
सौदे में करीब 350 करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोपों के बीच इटली में फिनमैकेनिका कंपनी [अगस्ता वेस्टलैंड की मातृ कंपनी] के सीईओ गियुसिपी ओरसी की गिरफ्तारी के बाद रक्षा मंत्रालय सीबीआइ जांच के आदेश पहले ही दे चुका है। इतालवी जांच एजेंसियां बीते करीब डेढ़ साल से फिनमैकेनिका कंपनी के खातों और लेनदेन की जांच कर रही हैं।
गांधी परिवार पर भी उठे सवाल
नई दिल्ली। वीवीआइपी हेलीकॉप्टर सौदे को लेकर अब सीधे गांधी परिवार विपक्ष के निशाने पर आ गया है। इस सौदे के लिए राजग कार्यकाल को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश में जुटी कांग्रेस का दांव उलटा पड़ता दिखाई दे रहा है। भाजपा सचिव किरीट सोमैया ने सीबीआइ को चिट्ठी लिखकर कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के नजदीकी कनिष्क सिंह की भूमिका पर सवाल उठाया है। वहीं, भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने इस मामले में इतालवी चार्जशीट का हवाला देते हुए पूछा है कि इसमें 'द फैमिली' कौन है, जिसे कंपनी ने 200 करोड़ रुपये रिश्वत दी थी। उन्होंने कोर्ट की निगरानी में या फिर विशेष जांच दल [एसआइटी] से जांच की मांग की।
संसद सत्र के नजदीक आते-आते हेलीकॉप्टर घोटाले का दायरा भी बढ़ने लगा है। इसे बोफोर्स-2 करार दे चुकी भाजपा भी अब परोक्ष रूप से इसे कांग्रेस के शीर्ष स्तर से जोड़ने में जुट गई है। मामले की जांच कर रही सीबीआइ को पत्र लिखकर किरीट ने कनिष्क सिंह और हेलीकॉप्टर घोटाले के बिचौलिये राल्फ हश्के के बीच संबंधों का दावा किया। इतना ही नहीं, कामनवेल्थ घोटाले से ही कनिष्क सिंह और हश्के की जोड़ी का तार बांधते हुए यह साबित करने की कोशिश भी की कि हेलीकॉप्टर घोटाले की परत काफी मोटी है।
किरीट ने कहा कि हश्के उस एम्मार एमजीएफ कंपनी का निदेशक था, जिसे कामनवेल्थ के दौरान भी बड़ा फंड मिला था। यह तोहफा कनिष्क से संबंध के कारण ही संभव हुआ था। लिहाजा हेलीकॉप्टर मामले में कनिष्क सिंह की भूमिका की जांच होनी चाहिए। किरीट ने इटली के ही एक समाचारपत्र का जिक्र करते हुए कहा कि बिचौलिये मिशेल के पिता कांग्रेस नेताओं के करीबी थे, जबकि पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने इटली के कोर्ट में पेश चार्जशीट के हवाले से ही सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि चार्जशीट में दो बार कहा गया है कि 'द फैमिली' को 200 करोड़ रुपये दिए गए थे। सरकार को बताना चाहिए कि 'द फैमिली' कौन है। राजग काल में हेलीकॉप्टर की शर्ते बदले जाने का हवाला देकर भाजपा को घसीटने की आलोचना करते हुए जावडे़कर ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि इसके लिए डील किसने की थी और रिश्वत किसके खाते में गई।
उन्होंने पूछा 'मोटा माल' किसके पास गया। भाजपा के तेवरों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले हफ्ते से शुरू हो रहे बजट सत्र पर भी भ्रष्टाचार का मुद्दा हावी होगा। जावडे़कर ने संप्रग को स्वतंत्रता के बाद की भ्रष्टतम सरकार करार देते हुए कहा कि सत्र के दौरान सरकार को जवाब देना होगा। उन्होंने कोर्ट की निगरानी में या फिर एसआइटी के द्वारा इस मामले की जांच की मांग की। उनकी इस मांग को माकपा नेता प्रकाश करात ने भी समर्थन दे दिया है।
बोफोर्स की राह पर हेलीकॉप्टर सौदा....!!!
भारत और विदेशी कंपनी के बीच हुए रक्षा सौदे में घोटाले की खबर विदेशी मीडिया में आना, भारत सरकार की ताबड़तोड़ प्रतिक्रिया, सीबीआइ जांच और विपक्ष की ओर से जेपीसी व विशेष जांच की मांग..। 90 के दशक में भारत की राजनीति में भूचाल लाने वाले बोफोर्स सौदे ने यही मोड़ देखे थे। संयोग है कि करीब दो दशक बाद इतालवी कंपनी अगस्ता-वेस्टलैंड के साथ हुए वीवीआइपी हेलीकॉप्टर खरीद सौदा भी इसी रास्ते से गुजर रहा है। ऐसे में आशंकाएं गहरा रही हैं कि बोफोर्स कांड की तरह हेलीकॉप्टर सौदे में भी कथित गड़बड़ियों का पता लगाने व सजा दिलाने में जांच एजेंसियां कहीं खाली हाथ न रह जाएं।
बोफोर्स सौदे के सुबूत हासिल करने में ही सीबीआइ को दस साल का वक्त लग गया था। स्वीडन से खरीदी गई बोफोर्स तोपों के सौदे में दलाली की 1989 में जांच शुरू करने के बाद सीबीआइ की पहली चार्जशीट ही 1998-99 में दाखिल हो पाई। साथ ही मामले के सुबूत हासिल करने में भी उसे करीब एक दशक का समय लगा। इस मामले के तार विदेशी मुल्कों में फैले थे और हेलीकॉप्टर सौदे में भी यही सामने आ रहा है। अतिविशिष्ट व्यक्तियों के लिए 12 एडब्ल्यू-101 हेलीकॉप्टर खरीद के सौदे को लेकर उलझी इतालवी कंपनी फिनमैकेनिका के मामले में आशंकाएं इसलिए लाजमी हैं, क्योंकि बीते डेढ़ साल में भारत द्वारा तीन बार अनुरोध करने के बावजूद इटली सरकार से उसे कोई जानकारी नहीं मिली है।
फिनमैकेनिका की सहयोगी कंपनी अगस्ता-वेस्टलैंड [यूके] के साथ हुए इस सौदे में ब्रिटेन से भी भारत को कोई खास मदद नहीं मिल पाई। हेलीकॉप्टर सौदे में सीबीआइ के लिए जांच भी आसान नहीं होगी। इसमें सबसे बड़ी अड़चन तो वे बड़े नाम हैं, जिनके सरकार में रहते हुए इतालवी कंपनी के लिए खरीद शर्तो में बदलावों को अंजाम दिया गया। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी तथ्यों के ब्योरे के मुताबिक सौदे की शर्तो में बदलाव की प्रक्रिया 2005 से 2006 के दौरान की गई। वहीं, यह सौदा 2010 में जाकर व्यापारिक करार के स्तर तक पहुंचा। इस दौरान रक्षा मंत्री, रक्षा सचिव, वायुसेना अध्यक्ष, एसपीजी प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पदों पर रहे व्यक्तियों में अधिकतर इस वक्त संवैधानिक पदों पर विराजमान हैं। ऐसे में सीबीआइ के लिए उनसे पूछताछ करना भी संभव न होगा।
वैसे भी विदेशी हथियार सौदों की जांच में सीबीआइ का रिपोर्ट-कार्ड कोई बहुत अच्छा नहीं रहा है। दक्षिण अफ्रीकी कंपनी डेनेल के साथ हुए रक्षा सौदे में रिश्वत के आरोपों की आठ साल बाद भी जांच चल ही रही है। वहीं बराक मिसाइल सौदे में गड़बड़ी की जांच भी रेंग रही है।
तब और अब: - तत्कालीन रक्षा मंत्री - प्रणब मुखर्जी - वर्तमान में राष्ट्रपति । तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार -एम के नारायणन - वर्तमान में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल । तत्कालीन रक्षा सचिव - शेखर दत्त - वर्तमान में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल । तत्कालीन एसपीजी प्रमुख - बीवी वांचू - वर्तमान में गोवा के राज्यपाल। पहली वीवीआइपी उड़ान का इंतजार हुआ लंबा
राजधानी के पालम टेक्निकल एरिया में खड़े तीन एडब्ल्यू-101 हेलीकॉप्टर का भविष्य अब अधर में है। वायुसेना के पायलट बीते कुछ समय से इन हेलीकॉप्टर पर महारत हासिल करने के लिए प्रशिक्षण ले रहे थे। वहीं सबकुछ ठीक चलता तो राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जल्द ही इस वीवीआइपी हेलीकॉप्टर की सवारी करने वाले पहले अतिविशिष्ट व्यक्ति होते। हालांकि विवादों में घिरने के बाद संभव है कि इन्हें वीवीआइपी उड़ान की इजाजत ही न मिल पाए।
वायुसेना अधिकारियों के मुताबिक इस हेलीकॉप्टर की उड़ान के लिए कम्यूनिकेशन स्क्वाड्रन के पायलटों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया पिछले कुछ समय से चल रही है। आधिकारिक सूत्र मानते हैं कि अतिविशिष्ट व्यक्तियों के इस्तेमाल के लिए खरीदे गए इन हेलीकॉप्टरों की उड़ान में दक्षता स्तर हासिल कर लेने के बाद राष्ट्रपति की यात्रा से ही इसका आगाज होता।
वहीं उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इस महीने 22 फरवरी को वायुसेना की पोखरण में होने वाले प्रहार क्षमता प्रदर्शन में विशेष अतिथि के तौर पर राष्ट्रपति को जैसलमेर से इस रेंज तक ले जाने के लिए इसके इस्तेमाल पर विचार होता। हालांकि अब जबकि पूरे सौदे पर ही तलवार लटक रही है तो तो अगस्ता-वेस्टलैंड से जनवरी 2013 में आए तीन हेलीकॉप्टरों को लेकर संशय गहरा गया है।
सूत्रों के अनुसार सौदा रद होने के बाद भी इन तीन हेलीकॉप्टरों की नियति तय होने में लंबा वक्त लग सकता है। ऐसे में वायुसेना को बिना इस्तेमाल के इन उड़नखटोलों की देखभाल करनी होगी। साथ ही वायुसेना को नए सिरे से वीवीआइपी परिवहन के लिए हेलीकॉप्टर की तलाश करनी होगी।
हेलीकॉप्टर सौदे की ऑडिट रिपोर्ट जल्द: कैग
अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआइपी हेलीकॉप्टर सौदे में रिश्वत लेने की खबरों के बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक [कैग] विनोद राय ने शुक्रवार को कहा कि इस विवादास्पद सौदे का ऑडिट [लेखा परीक्षण] हो रहा है। जल्द ही इसकी रिपोर्ट जारी की जाएगी।
बैंकर्स विचार-गोष्ठी में प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान सौदे पर पूछे गए सवाल पर राय ने कहा, 'कैग ने रक्षा मंत्रालय का ऑडिट किया है और इस मामले [अगस्ता-वेस्टलैंड सौदा] में भी यह प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही आप लोगों को इसका पता चलेगा।' 3600 करोड़ के सौदे की ऑडिट रिपोर्ट की स्थिति के बारे में उन्होंने कहा, 'ऑडिट प्रक्रिया चल रही है, लेकिन मुझे यह नहीं पता कि यह कब तक पूरा होगा। मैं ऑडिट की स्थिति से अवगत नहीं हूं।' आरोप है कि इस सौदे को हथियाने के लिए 362 करोड़ रुपये की रिश्वत बांटी गई।

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