Breaking

Post Top Ad

Your Ad Spot

मंगलवार, 26 अप्रैल 2016

भूजल संकट पर NGT सख्त, मांगा यूपी के सभी स्लॉटर हाउसों का ब्यौरा....!!!

भूजल संकट पर NGT सख्त, मांगा यूपी के सभी स्लॉटर हाउसों का ब्यौरा....!!!
@@@....नियमानुसार काम नहीं हुआ तो होगी कड़ी कार्रवाई....!!!
News Highlights
* बफैलो मीट एक्सपोर्ट यूनिटों से लिखित ब्यौरा तलब
* मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी
                          भूजल संकट पर एनजीटी सख्त
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बिना अनुमति के रोजाना लाखों लीटर भूजल का दोहन करने वाले स्लॉटर हाउस और बफैलो मीट एक्सपोर्ट यूनिटों पर निगाहें टेढ़ी कर दी हैं। एनजीटी ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्लॉटर हाउसों और मीट एक्सपोर्ट यूनिटों का ब्यौरा तलब किया है। ब्योरे में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, सेंट्रल ग्राउंड वॉटर अथॉरिटी से भूजल दोहन की अनुमति की एनओसी और दूसरे प्रमाण पत्र मांगे गये हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होनी है। इस केस में मीट और चर्बी की दुर्गंध और जल प्रदूषण की बेहद गंभीर समस्या भी शामिल है।
इस प्रकरण में जिलाधिकारी डा. बलकार सिंह के निर्देश पर सीएमओ डा.ए के राय, सीवीओ डा.देवेंद्र राजपूत, सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आरएम प्रमोद कुमार मिश्रा सहित पांच अधिकारियों की टीम गठित की गई है, जो स्लॉटर हाउसों में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और भूजल दोहन के सभी क्रियाकलापों की निगरानी कर रही है। एडीएम सिटी अवधेश तिवारी ने बताया कि स्लॉटर हाउसों की हर पखवाड़े सिटी मजिस्ट्रेट या एसीएम स्तर के अधिकारी निगरानी करेंगे। अगर नियमानुसार काम नहीं हुआ तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। इस संबंध में मीट एक्सपोर्ट यूनिटों के संचालकों की बैठक कर उन्हें सभी नियमों से सख्ती के साथ अवगत करा दिया गया है।

                     सिटी मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी करेंगे निगरानी

उल्लेखनीय है कि अमर उजाला ने लगातार इस प्रकरण में मुहिम छेड़ रखी है। 25 जनवरी को एनजीटी ने इस प्रकरण में केस नंबर 38/2016 को स्वीकार किया था। 24 फरवरी को पहली तारीख थी जिसके बाद 4 अप्रैल की तारीख में एनजीटी ने पूरे प्रदेश से संबंधित ब्योरा तलब किया है। इससे पहले केवल अलीगढ़, संभल, मुरादाबाद और गाजियाबाद से इस संबंध में जानकारी मांगी गई थी l क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय से इस संबंध में कार्यवाही की जा रही है। वरिष्ठ वैज्ञानिक जेपी सिंह ने बताया कि सभी विभागों के संयुक्त जवाब जिला प्रशासन के माध्यम से एडवोकेट सावित्री पांडेय के माध्यम से शीर्ष अदालत में भेजे जा रहे हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

Post Top Ad

Your Ad Spot

अधिक जानें