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शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016

उ. प्र. के राज्यपाल के आगमन प्रोटोकाल के नाम पर पुलिसिया तांडव....!!!

!!!....उ. प्र. के राज्यपाल के आगमन पर जिला / पुलिस प्रशासन द्बारा किए गये सुरक्षा व्यवस्था पर जनता ने उठाया सवाल....????
@@@....प्रोटोकाल के नाम पर पुलिसिया तांडव....!!!
प्रतापगढ । हिन्दी नववर्ष के शुभ अवसर पर आज सुबह 10 बजे हादीहाल "तुलसी सदन" में उ. प्र. के राज्यपाल वतौर मुख्य अतिथि होकर नगर क्षेत्र के वीचोंवीच का कार्यक्रम तय था l उनके आगमन पर जिला व पुलिस प्रशासन द्बारा किए गये सुरक्षा व्यवस्था पर जनता ने सवाल किया है....????

व्यापारियो का तर्क है कि सड़क पर जिला प्रशासन अपना पहरा लगा सकता है l सुरक्षा ब्यवस्था के लिहाज से सड़क पूर्णतय: बंद की जा सकती है l परन्तु जिला प्रशासन का पुलिस लाइन से भंगवा चुंगी और भंगवा चुंगी से हादीहाल "तुलसी सदन" तक की सभी दुकानों को जिस तरह डंडे के दम पर जबरन बंद कराया गया, वो किसी तुगलकी फरमान से कम न था.....!!!
राज्यपाल के जिला मुख्यालय आगमन से पूरा शहर अस्त-ब्यस्त रहा l आधे शहर की दुकानों को जबरन बंद कराना अंगरेजी हुकूमत की याद ताज़ाकर गया l अभी इन्हीं दुकानों को बंद कराने का कार्य कोई राजनैतिक अथवा सामजिक संगठन किसी जनहित के मुद्दे पर ऐसे जबरदस्ती बंद कराए होता तो उस पर एक मुकदमा जरूर बख्सीश में मिला होता...!!!
इस तरह राज्यपाल के आगमन से नगर क्षेत्र के आधे से अधिक हिस्से के दुकानदारों का एक दिन का व्यसाय प्रभावित हुआ। क्या जिला प्रशासन विना दूकान बंद कराए राज्यपाल का नगर आगमन का कार्यक्रम सुचारू रूप से सम्पन्न कर पाने में अक्षम थी, जिसके कारण दुकानों को बंद कराने का तुगलकी फरमान जारी करना पड़ा l इससे तो जिला प्रशासन की साख पर भी सवाल खड़ा होता है....!!!
कई लोंगों ने दवी जुवान से ये कहा कि जब से सूबे के राज्यपाल के रूप में श्री राम नाइक जी शपथ लेकर कमान सभाली है तबसे लगातार उ. प्र. की क़ानून ब्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है, जिसके कारण सरकार और राजभवन में बराबर टकराव की ख़बरें सार्वजनिक होती रही हैं l सूबे में खराब कानून व्यवस्था पर राज्यपाल द्बारा उठाए जा रहे सवाल के चलते शायद दिखावा के लिए ये सब किया गया...!!!
सब कुछ लकदक और चाक - चौबन्द दिखे इसी उद्देश्य से प्रतापगढ़ नगर आगमन पर राज्यपाल महोदय के लिए सड़क आवागमन रोकने के साथ-साथ दुकानों को भी बंद करा दिया गया l जिसको लेकर आज नगर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चा रही l प्रतापगढ़ की पुलिस वास्तव में नकारा हो चुकी है l सिर्फ कमजोर और असहाय व दीनहीन लोंगों को अपना शिकार बनाती है l ए. आर. टी. ओ. कार्यालय की लूट में अभी तक पुलिस के हाथ कुछ नहीं लग सका....!!!
इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्यपाल के नगर आगमन पर जिस तरह पुलिस सुरक्षा को लेकर परेशान दिखी, यदि ऐसे ही जनपद की नकारा पुलिस हर रोज सक्रियता दिखाती तो प्रतापगढ़ में इतना अपराध न बढ़ता l जिस प्रदेश का पुलिस महानिदेशक सार्वजनिक रूप से बोले कि प्रतापगढ़ में कौन अपराध करा रहा है, ये बात किसी से छिपी नहीं है....??? ऐसे पुलिस के मुखिया के बयान से पूरे पुलिस महकमा को चिल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए...!!!
चूंकि महामहिम जी जब से सूबे में राज्यपाल की कुर्सी संभाले तभी से अखिलेश सरकार पर सवाल खड़ा करते रहे हैं l शायद इसी को बचाने और उन्हें दिखाने के लिए उनके नगर आगमन पर पुलिस लाइन से लेकर भंगवा चुंगी और वहां से हादीहाल तक की सभी दुकानों को महामहिम की सुरक्षा ब्यवस्था का हवाला देकर रोज कमाने खाने वाले आम जनता के पेट पर प्रतापगढ़ की पुलिस ने जिस तरीके से लात मारा l वो भी शर्मसार करने वाला है....!!!
देश में विशिष्ट और अतिविशिष्ट ब्यक्तियों के लिए जो प्रोटोकाल बनाया गया है, उसमें जनता के शोषण और उसके उत्पीड़न के लिए कोई स्थान नहीं दिया गया है, परन्तु यथार्थ में उसका पालन कराने के लिए सिस्टम में बैठे जो कहने के लिए जनता के नौकर हैं यानि गवर्मेन्ट सर्वेंट/पब्लिक सर्वेंट l ये सिर्फ कहने के लिए है l हकीकत में आज के राजा यही हैं और जनता जो कहने के लिए लोकतंत्र में मालिक है, वही सिस्टम की असली प्रजा है l प्रोटोकाल क्या राजधानी लखनऊ में नहीं हुआ करता l यदि प्रतापगढ़ जैसे हालात लखनऊ के हों तो वहां रोज ही सभी दुकाने बंद करा दी जाए l परन्तु वहां तो ऐसा नहीं है l फिर एक प्रोटोकाल को दो तरह लागू करना समझ के परे है....!!!
सबसे बड़ा और अहम सवाल ये है कि जनतंत्र में जनता ही मालिक है और उसी जनता को जिस तरह प्रताड़ित किया जाने लगा है, उससे तो अंग्रेजों के गुलामी के वक्त याद आना स्वाभाविक है l प्रतापगढ़ की पुलिस वास्तव में नकारा हो चुकी है l सिर्फ कमजोर और असहाय व दीनहीन लोंगों को अपना शिकार बनाती है l एआरटीओ कार्यालय की लूट में अभी तक पुलिस हाथ कुछ नहीं लग सका है l इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्यपाल के नगर आगमन पर जिस तरह पुलिस सुरक्षा को परेशान दिखी, यदि ऐसे ही हर रोज पुलिस की सक्रियता दिखा करती तो प्रतापगढ़ में इतना अपराध न बढ़ता....!!!
धन्य हो जनतंत्र/लोकतंत्र तेरी जय हो....!!! कहने के लिए जनतंत्र में जनता सर्वोपरि है, परन्तु हकीकत जनतंत्र की कुछ अलग ही है, जहाँ जनता रोज सिस्टम की गुलाम हो जाया करती है l सिर्फ मतदान के दिन उसे कहने के लिए मालिक का दर्जा दिया जाता है l कहीं - कहीं वो भी नहीं होता l मतदान के दिन भी जिसकी लाठी, उसकी भैंस वाली कहावत अधिकतर स्थानों पर देखने को मिल जाता है l हम कल भी गुलाम थे और आज भी गुलाम हैं...!!!
हां, अंतर सिर्फ इतना है कि पहले हम गोरे अंग्रेजों के गुलाम थे और आज सिस्टम के गुलाम हैं l पहले भी गोरों के इशारों पर आम जनता भारतीयों यानि चाटुकारों के हाथों कोड़े खाती थी और आज सिस्टम में बैठे लोंगों के इशारे पर पुलिस जनता को डंडे से पीटा करती है l यही भारत का असली लोकतंत्र है l जनहित की बात सिर्फ मुंह से जनप्रतिनिधियों और नौकरशाहों द्वारा तो की जाती है, परन्तु हकीकत में अपना हित सर्वोपरि होता है और जनहित सिर्फ दिखावे के लिए किया जाता है....!!!

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