मेलोडी इतनी चॉकलेटी कैसे बनी, इससे ज्यादा ये जानना जरुरी है कि ओवैसी
इतना हरामखोर कैसे बना ?
भारत की आजादी के बाद जब 565 रियासतों को भारत के अधीन लाने की मुहीम सरदार पटेल को सौंपी गई थी, उस समय हैदराबाद के निज़ाम की आस्था पाकिस्तान के साथ शामिल होने की थी l लेकिन भौगोलिक रूप से पूर्वी एवं पश्चिमी पाकिस्तान की दूरी एवं वास्तविकता में इसे असंभव देखते हुए निज़ाम ने हैदराबाद को भारत गणराज्य से अलग एवं स्वतंत्र रखने का निर्णय किया l
जिसके बाद उसकी सेना दो धड़ों में बट गई l पहली शोहेबुल्लाह खान के साथ, जो भारत में विलय का पक्षधर था l दूसरा खेमा था रजाकारों का, जिसका सबसे प्रभुत्वशाली व्यक्तित्व था, कासिम रिजवी का l कासिम रिजवी अलीगढ़ से वकालत पढ़ कर आया था और स्वतंत्र हैदराबाद की पैरवी करता थाl
कासिम रिज़वी ने वर्ष 1927 में नवाब बहादुर रायजंग के साथ मिलकर MIM नामक सामाजिक संस्था बनाई थी, जो कि एक कट्टरपंथी संगठन में परिवर्तित हो गई और रायजंग की मौत के बाद वर्ष 1944 में कासिम का MIM पर एकाधिकार हो गया और उसने रजाकारों की फ़ौज बनाकर वहां के हिंदुओं पर अत्याचार करने शुरू कर दिए l
रिज़वी ने सरदार पटेल पर अपनी बात मनवाने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन असफल रहाl जिसके बाद उसने शोहेबुल्लाह की हत्या करवा दी और हिंदुओं मैं लूटपाट और क़त्ल-ए-आम शुरू कर दियाl सरदार पटेल के आदेश पर भारतीय सेना ने रजाकारों को कुचलकर हैदराबाद पर कब्ज़ा कर लिया l

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