सांसद कुँवर हरिवंश सिंह ने मनाया निजी सचिव रहे राघवेंद्र सिंह "राजू" का मूर्ख दिवस पर दिल्ली में जन्मदिन

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प्रतापगढ़ के सांसद कुँवर हरिवंश सिंह और सांसद के निजी सचिव रहे राघवेंद्र सिंह का कारनामा...!!!
प्रतापगढ़। 39 संसदीय क्षेत्र के सांसद कुँवर हरिवंश सिंह के पूर्व निजी सचिव राघवेंद्र सिंह "राजू" जो साढ़े चार वर्षों तक मलाई खाया और 6 माह जब कार्यकाल शेष बचा तक वह प्रतापगढ़ से अपने को दूर कर लिया। सवाल उठता है कि आखिरी वक्त में निजी सचिव राजू ने ऐसा क्यों किया ? बहुत छानबीन किया तो पता चला कि विकास भवन जाते समय जब मंगरौरा ब्लाक प्रमुख श्रीमती कंचन पटेल के पति कुलदीप पटेल को डी ए वी कालेज के मोड़ के आगे कैबिनेट मंत्री मोती सिंह के बेटे नंदन सिंह के साथ चलने वाले नंदन सिंह यूथ ब्रिगेड से जुड़े लोंगो का विवाद हुआ था। जिसमें कुलदीप पटेल को लोंगो ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था। उस वक्त कुलदीप पटेल की गाड़ी पर सांसद कुँवर हरिवंश सिंह के निजी सचिव राघवेंद्र सिंह "राजू" की भी पिटाई हो गई थी। ऐसी खबर उस वक्त प्रकाशित हुई थी। फिलहाल उस घटना में अनायास शिकार हो गए राघवेंद्र सिंह "राजू" ने भागकर चालाकी दिखाते हुए अपनी जान बचाई थी।
राघवेंद्र सिंह "राजू" को उस दिन इस बात का एहसास हो गया कि अब प्रतापगढ़ उनके लिए महफूज नहीं रहा। इसलिए वक्त की नजाकत को भांपते हुए राजू ने दिल्ली में रहकर सांसद कुँवर हरिवंश सिंह का सहयोग करने का मन बनाया। मूर्ख दिवस एक अप्रैल को सांसद कुँवर हरिवंश सिंह ने अपने दिल्ली आवास पर निजी सचिव रहे राघवेंद्र सिंह "राजू" का जन्मदिन मनाया। उन्हें केक काटकर खिलाया। बहुत दिन बाद सांसद कुँवर हरिवंश सिंह और उनके निजी सचिव की फोटो एक साथ देखने को मिली। प्रतापगढ़ के लोग मोदी लहर में कुँवर हरिवंश सिंह को न जानते हुए भी देश के नाम पर एक वोट मोदी के हाथों को मजबूत करने के लिए दिया था। कुँवर  साहेब बिना हींग व हर्रय लगाए ही महज 15दिनों में प्रतापगढ़ के सांसद बन गए। हाँ ये अलग विषय रहा कि अपना दल को मिली दो सीटों में एक पर अनुप्रिया पटेल ने चुनाव लड़ा और दूसरे पर कुँवर साहेब को भाजपा और अपना दल का संयुक्त उम्मीदवार बनाया। अब इस उम्मीदवारी में कितने खोखे गले ये तो पाने वाला अथवा देने वाला ही बता सकता है। सबसे खास बात ये रही कि वर्ष-2009 में जीतने वाला उम्मीदवार राजकुमारी रत्ना सिंह जितना कुल वोट पाई थी,वर्ष-2014 के आम चुनाव में कुँवर हरिवंश सिंह उतने मतो की लीड से चुनाव जीते।
सबसे बड़ा दुर्भाग्य प्रतापगढ़ का ये रहा कि प्रतापगढ़ की जनता ने जिस दृढ़ इच्छाशक्ति से सांसद के रूप में कुँवर हरिवंश सिंह को अपना भाग्य विधाता माना,वहीं कुँवर हरिवंश सिंह प्रतापगढ़ के पाँच विधानसभाओं में से एक अदद अपना प्रतिनिधि भी नहीं ढूंढ सके। अपने पाँच वर्ष के कार्यकाल में तीन कार्यालय प्रभारियों के रूप में एम पी सिंह, जितेंद्र सिंह एवं नरेंद्र दुबे को रखा जो दूसरे जनपदों के रहे। निजी सचिव की बात की जाए तो पहले निजी सचिव राघवेंद्र सिंह "राजू" रहे जो साढ़े चार वर्ष तक मलाई काटते रहे। अंत में जवाबदेही के वक्त दीपक मिश्र को बलि का बकरा बनाने के लिए कुँवर हरिवंश सिंह ने दांव चला। हो सकता हो कि दीपक मिश्र के नाम को खुद राघवेंद्र सिंह "राजू" ने ही सुझाया हो। इसके पीछे भी कुँवर हरिवंश सिंह की एक सोची समझी रणनीति दिख रही है। कुँवर साहेब साढ़े चार वर्ष तक क्षत्रिय को अपना निजी सचिव बनाए रखा और अंत में ब्राह्मणों को दिखाने के लिए निजी सचिव पद पर रखा। हलाँकि  इस बार भी निजी सचिव बने दीपक मिश्र प्रतापगढ़ से मिलान नहीं करते। कुँवर साहेब दीपक मिश्र को रखकर समाज में ये संदेश देना चाहते हों कि उनके दिलोदिमाग में ब्राह्मणों के प्रति कितना प्रेम है ? भाजपा का नारा सबका साथ,सबका विकास में फार्मूले को कुँवर साहेब सिद्ध कर दुबारा सांसद बनना चाहते हैं जो टेढ़ी खीर साबित होगी।
कुँवर साहेब प्रतापगढ़ संसदीय सीट से दूसरी बार सांसद बनने की जोरदार आजमाईश कर रहे हैं। मुम्बई से लेकर दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के यहां डेरा डाले हुए हैं। कुँवर हरिवंश सिंह भाजपा के सिम्बल से भी चुनाव लड़ने को तैयार हैं और अपना दल मूल से अलग दल बनाकर भाजपा से सिर्फ एक सीट प्रतापगढ़ से समझौता कर उम्मीदवार बनना चाह रहे हैं। परन्तु प्रतापगढ़ की सम्मानित जनता का मत है कि इस बार स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही कुँवर हरिवंश सिंह का प्रचार करने क्यों न आ जाएं,परन्तु उन्हें प्रतापगढ़ की जनता से उनका बहुमूल्य मत न दिला सकेंगे। प्रतापगढ़ में कुँवर हरिवंश सिंह को यदि किसी ने डुबाने और बर्बाद करने का कार्य है तो वो सिर्फ और सिर्फ राघवेंद्र सिंह "राजू" ही हैं। बचा खुचा कार्य कुँवर हरिवंश सिंह के भतीजे राणा सिंह एवं उनके रिश्तेदार बाबा ने पूरा कर दिये। पट्टी विधानसभा में रुद्र प्रताप सिंह उर्फ बच्चा ने तो इंडिया मार्का हैंडपंप और सोलर लाइट्स बेंचकर कुँवर हरिवंश सिंह की पूरी इज्जत का जनाजा ही निकाल दिए। कुँवर हरिवंश सिंह से प्रतापगढ़ की जनता बड़े कार्य की उम्मीद पाल रखी थी। परन्तु नाउम्मीद में तब्दील हो गई।
चूँकि प्रतापगढ़ की जनता जानती थी कि कुँवर हरिवंश सिंह मुम्बई के बड़े बिल्डरों में से हैं। रियल स्टेट सहित शिक्षा जगत में बड़ा कार्य करके राजनीति में वे प्रवेश किये थे तो कुँवर साहेब से प्रतापगढ़ की जनता की उम्मीद पाल रखना जायज भी रहा। परन्तु कुँवर हरिवंश सिंह भी अपने को बम्बा और खम्बा तक ही सीमित कर रह गए। कुँवर साहेब के ऊपर सांसद निधि तक बेंचने का आरोप लगा। कुँवर साहेब के दरबार में सांसद निधि में 50% कमीशन तक वसूलने का आरोप लगा। कमीशन का धन पहले नकद ले लिया जाता था तो निधि के लिए पत्र लिखा जाता था। प्रतापगढ़ में कार्पोरेट सेक्टर से होने वाले कार्यो में भी कुँवर हरिवंश सिंह पर कमीशन लेकर कार्य देने का आरोप लगा। स्कूलों में जो कार्य कराए गए उसकी जाँच कराने से सारी आज भी पोल पट्टी खुल जाएगी। प्रतापगढ़ की जनता इस राज़ को आजतक न समझ सकी कि कुँवर हरिवंश सिंह की ऐसी कौन सी कमजोर नस निजी सचिव राघवेंद्र सिंह के हाथ में दबी थी,जिससे कुँवर साहेब अपने पुत्र रमेश प्रताप सिंह को भी नजरअंदाज कर निजी सचिव राजू को अधिक महत्व दिया। जबकि रमेश प्रताप सिंह जौनपुर में शाहगंज के ब्लाक प्रमुख रहे और उन्हें राजनीतिक ज्ञान भी रहा। वो सदैव निजी सचिव राघवेंद्र सिंह "राजू" का विरोध करते रहे,परन्तु पिता के आगे बेटे की एक न चली और थक हारकर वो प्रतापगढ़ आना ही छोड़ दिये। ये हकीकत है जिससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता।

rameshrajdar

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