राजा भईया के राजनीतिक जीवन की दूसरी पारी रजत जयंती समारोह की सफलता हेतु समर्थकों ने झोंकी ताकत

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सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,देखना है जोर कितना बाजू-ए-कातिल में है...???
राजा भईया द्वारा लेटर पैड पर खुला आमंत्रण पत्र हुआ जारी...
कहते हैं कि पहला प्रभाव अंतिम प्रभाव माना गया है शायद राजा भईया भी इस फार्मूले को मानते हैं। 25वर्ष के राजनीतिक जीवन की सफलता पर राजा भईया के समर्थकों द्वारा लखनऊ में रजत जयंती समारोह की सभी तैयारियां जोरो पर। समर्थकों में भारी उत्साह। प्रतापगढ़ से सपा के टिकट पर निर्विरोध MLC निर्वाचित हुए अक्षय प्रताप सिंह "गोपाल जी" और जिला सहकारी बैंक के चेयरपर्सन K N ओझा, राजा भईया के PRO ज्ञानेन्द्र सिंह,बाबागंज के निर्दलीय विधायक विनोद सरोज,प्रवक्ता का कार्य देख रहे अश्वनी सिंह एवं गोपाल जी के मीडिया प्रभारी मूक्कू ओझा ने दिन रात्रि एक करके इस आयोजन को सफल बनाने की कोई कमी नहीं छोड़ी है। रूठे लोंगो तक पहुँचना और उन्हें मनाना भी इसका प्रमुख हिस्सा रहा। सपा से MLC होते हुए भी गोपाल जी इस बात को दरकिनार कर पूरी निष्ठा व ईमानदारी के साथ राजा भईया के प्रति समर्पण भावना को पुनः सिद्ध कर दिखाया। जिले और प्रदेश के बाहर अन्य प्रांतों में रजत जयंती समारोह को सफल बनाने के लिए गोपाल जी लगे रहे। सिर्फ एक लक्ष्य कि किसी तरह रजत जयंती समारोह सफल हो जाए। गोपाल जी की भागदौड़ को देखकर लग रहा था जैसे लोकसभा चुनाव में स्टार प्रचारक क्षेत्र में दौराकर उम्मीदवार के लिए चुनाव जिताने की कोशिश करता है।
लखनऊ ले जाने के लिए स्पेशल ट्रेन की दी गई है सुबिधा...
प्रत्येक व्यक्ति में महत्वकांक्षा होती है। अब राजा भईया उससे अछूते तो हैं नहीं ! सो उन्होंने वर्तमान स्थिति का आंकलन कर अपने राजनीतिक भविष्य को देखते हुए समर्थकों संग नई राजनीतिक पार्टी के गठन पर विचार किया। जिसके लिए दिन चुना गया 30नवम्बर। चूँकि राजा भईया अपना राजनीतिक जीवन के 25वर्ष पूर्ण कर लिए तो उसी के उपलक्ष्य में राजा भईया के नेतृत्व में 30नवम्बर,2018के दिन से राजनीति की दूसरी पारी खेलने की शुरुवात नए राजनीतिक दल की घोषणा करने की योजना थी जो अति उत्साह में पहले समर्थकों ने उसका भांडा फोड़ दिया और बाद में राजा भईया स्वयं 16नवम्बर को लखनऊ में प्रेस आयोजित कर 30नवम्बर की घोषणाओं पर पानी फेर दिया। पहले राजा भईया के समर्थकों ने इसकी शुरुवात की और बाद में राजा भईया स्वयं उसका पटाक्षेप कर दिया। राजनीतिक पार्टी का नाम और झंडा तक घोषित कर दिया गया है। अब सिर्फ एक ही बात शेष रह गई है वो है राजधानी लखनऊ में रमाबाई मैदान को भर पाने की।रमाबाई मैदान भरने के लिए राजा भईया व उनकी टीम में लगे लोग जनता को लखनऊ तक पहुँचने के लिए संसाधन भी मुहैया करा रहे हैं। कुंडा और बिहार में पंचायत प्रतिनिधियों पर  विशेष अपेक्षा है कि दोंनो विधानसभाओं से कम से कम एक लाख की भीड़ अपेक्षित है। देखना है कि राजा भईया की इस अपेक्षा पर उनके पंचायत प्रतिनिधि कितना खरा उतरते हैं ?
रजत जयंती समारोह का खुला आमंत्रण पत्र...
राजा समर्थकों की अग्नि परीक्षा सिर्फ और सिर्फ आयोजन को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक भीड़ को मैदान तक पहुंचाना है,ताकि जनता में संदेश चला जाए कि रमा बाई मैदान को मोदी और माया के बाद राजा भईया भी भरने का सामर्थ्य रखते हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की जनसभा जो विधानसभा चुनाव 2017 की अधिसूचना से पहले 4 जनवरी,2017 को हुई थी,उसमें अपार भीड़ पहुँची थी। रमाबाई मैदान को सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की जनसभाओं में जनता से भरा देखा गया है। अब राजा भईया और उनके समर्थकों ने रमाबाई मैदान भरने की ठान ली है। राजा भईया के सामर्थ्य में तो कमी नहीं है,परन्तु उनके समर्थकों में तमाम विसंगतियां विद्यमान हैं। बहुत कुछ होते हुए भी सभी में अनुभव का जबरदस्त अभाव है। राजा भईया की टीम में गोपनीयता की बात करना तो बेईमानी होगी। राजा भईया के गोपनीय कक्ष की बातें भी समय से पहले सार्वजनिक हो जाती हैं। जो अति गोपनीय विषय होते हैं वो भी गोपनीय कक्ष में टाईपिंग के दौरान कुछ अति विशेष लोंगो द्वारा उसे समय से पहले सार्वजनिक कर दिया जाता है। जिससे असहजता उत्पन्न होती है। राजा भईया की सोशल मीडिया कंपेन के लिए भी आपसी कलह देखने को मिलती है। एक-दूसरे को नीचा दिखाकर स्वयं को राजा भईया सबसे नजदीक और खास बनने की भी होड़ लगी रहती है। हद तो तब हो जाती है जब एक समर्थक दूसरे समर्थक की पोस्ट को ही फेंक और अनाधिकृत बता देता है 
होर्डिंग्स में दिखा पंचायत प्रतिनिधियों में आपसी कलह की तस्वीर विधायक विनोद सरोज की तस्वीर होर्डिंग्स से गायब...
राजा भईया के समर्थकों में भी आपसी खींचातानी खूब देखने को मिलती है। गुटबाजी भी जमकर होती है। राजा भईया के राजनीतिक भविष्य के लिए ये सबसे बड़ा संकट होगा। साथ ही राजा भईया को भी अति गंभीर होना होगा। राजनीति में कनफुसकियां खूब की जाती हैं। लिहाजा कान का कच्चापन भी उन्हें दूर करना होगा। राजसत्ता को अपने से अलग करते हुए जनसत्ता का वास्तविक रूप धरातल पर जनता जनार्दन को दिखाना होगा। सामंतवादी व्यवस्था को भी त्यागना होगा। उदाहरण के लिए जनपद प्रतापगढ़ में जिस तरह पूरे शहर में सिर्फ राजा भईया की होर्डिंग्स और बैनर से चौराहे पाट दिए गए हैं उससे जनता में गलत संदेश भी जा सकता है। दबी जुबान से लोग आपस में बातचीत करते सुने गए कि अब प्रतापगढ़ शहर भी लगता है कुंडा हो जाएगा। राजा भईया को राजनीतिक क्षितिज पर पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी और तमाम बातों पर गंभीरता से विचार कर उसे अपने समर्थकों के अंदर से निकालना होगा। चूँकि अब राजा भईया का कद सिर्फ और सिर्फ कुंडा व बाबागंज तक ही सीमित नहीं रहेगा। इस तरह से राजा भईया को अपने प्रस्तावित राजनीतिक दल को ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए बहुत त्याग करना होगा। वर्ना राजनीतिक दल तो हजारों बने परन्तु अंत में उसका किसी बड़े दल में विलय ही हुआ। जिस तरह नदी महासागर में मिलती हैं,ठीक उसी तरह छोटे दल भी समय-समय पर अपने फायदे के लिए बड़े दलों में मर्ज होते देखे गए हैं। राजा भईया को अपनी पार्टी को शीर्ष तक ले जाने के लिए इससे बचना होगा।

rameshrajdar

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